पेशावर हमले के चार दिन बाद ही पाकिस्तान सरकार ने आंतक और दहशतगर्दों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आतंकवादियों को फांसी पर लटका दिया। दोनों आंतकियों को देर शाम फैसलाबाद की जेल में फांसी दी गई।
दोनों को अदालत ने दो साल पहले फांसी की सजा मुकर्रर की थी लेकिन इस पर रोक के चलते दोनों आतंकी जेल में ही बंद थे। फांसी पर लटकाए गए आतंकियों में से एक 2003 में परवेज मुशर्रफ पर हमले तो दूसरा 2009 में श्रीलंका की क्रिकेट टीम पर जानलेवा हमला करने का दोषी था।
वहीं इसके साथ ही आठ और कैदियों को भी अगले कुछ घंटों में फांसी देने की तैयारी है। इन सभी के डेथ वारंट जेल में पहुंच चुके हैं जिन्हें किसी भी समय फांसी पर लटकाया जा सकता है। दोनों आतंकियों के साथ ही चार अन्य आतंकियों के डेथ वारंट पर सेना प्रमुख राहिल शरीफ ने गुरुवार रात ही हस्ताक्षर किए थे। इनमें से दो को फांसी पर लटका दिया गया जबकि बाकी चार को जल्द लटकाया जा सकता है।
श्रीलंका टीम और मुशर्रफ पर हमले के थे दोषी
पेशावर हमले के बाद आतंकियों पर कड़ी कार्रवाई के चौतरफा दबाव के चलते पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार ने दो दिन पहले ही आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही थी, इसी कड़ी में पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने आतंकवादियों को दी जाने वाली फांसी की सजा से रोक हटा ली थी।
जिसके बाद जेलों में बंद हजारों आतंकवादियों को फांसी देने का रास्ता साफ हो गया था। पाक सरकार ने घोषणा के दौरान ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि फांसी की सजा पर जल्द ही अमल किया जाएगा।
इसी कड़ी में पाकिस्तान सरकार ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाते हुए दो दुर्दांत आतंकियों को फैसलाबाद जेल में फांसी पर लटका दिया। मौत की सजा पाए आतंकियों का नाम अकील उर्फ डा. उस्मान और अरशद महमूद हैं।
इनमें से डा. उस्मान 2009 में श्रीलंका क्रिकेट टीम पर हमले का दोषी था, जिसमें कई श्रीलंकाई खिलाड़ी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके अलावा उस्मान सेना मुख्यालय पर हमले के मामले में भी दोषी था, जिसके बाद उसे आतंकवाद निरोधी अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी।
आठ और आतंकियों का डेथ वारंट जेल पहुंचा
वहीं दूसरा आतंकी अरशद महमूद पूर्व राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष जनरल परवेज मुशर्रफ पर हमले के मामले में पांच दोषी आतंकियों में से एक था। इसके अलावा भी उस पर कई जघन्य मामलों में शामिल होने का आरोप था। इस मामले में अदालत ने उसे भी मौत की सजा सुनाई थी।
लेकिन 2008 में राष्ट्रपति जरदारी द्वारा फांसी की सजा पर रोक लगाने के बाद से ही सभी आतंकी जेल में रहकर अपनी सजा काट रहे थे। लेकिन 16 दिसंबर को पेशावर में स्कूल में हुए आतंकी हमले ने पूरी फिजा को बदल दिया।
जिसके बाद पाक सरकार ने फांसी की सजा पर से रोक हटाते हुए लगभग एक हजार के करीब आंतकियों की फांसी का रास्ता साफ कर दिया था। वहीं फैसलाबाद जेल में इन आंतकियों को फांसी देने के तुरंत बाद पाक सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ ने ट्विट करते हुए बताया कि इनके अलावा आठ और अन्य आतंकवादियों को किसी भी समय फांसी दी जा सकती है।
सभी के डेथ वारंट जेल अधीक्षक के पास पहुंच चुके हैं जिन पर कभी भी अमल किया जा सकता है।