मेरठ के शाहजहांपुर में मंगलवार तड़के हुए हादसे का मंजर देखकर लोगों की रूह कांप गई। सड़क पर चारों ओर खून ही खून पड़ा था। डीजल बह रहा था। जगह-जगह पेड़ उखड़े पड़े थे तो कई दुकानों के पिलर टूटे पड़े थे। वहीं ट्राले के पहियों के निशान काफी दूर तक दिख रहे थे। मौके पर पूरे दिन भीड़ लगी रही। वहीं क्षतिग्रस्त ट्राला सड़क से न हट पाने के कारण जाम की स्थिति बनी रही।
मंगलवार रात लगभग साढ़े तीन बजे गढ़ की ओर से ट्राले की शाहजहांपुर में टाटा 407 से जबरदस्त भिड़ंत हो गई थी। इसमें टाटा 407 के चालक अफजाल पुत्र उम्मेद निवासी असीलपुर और सनी पुत्र हरिओम निवासी नंगली किठौर की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं इंद्र पुत्र दाताराम, गोलू उर्फ हिमांशु, अशोक पुत्र चंद्रपाल, देवी पुत्र शरण निवासी नंगली किठौर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वहीं ट्राले का हेल्पर चांद भी गंभीर रूप से जख्मी हो गया था।
मेडिकल कॉलेज में घायलों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। टाटा 407 में फंसे शवों को पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला था। उधर, असीलपुर और नंगली किठौर में मृतकों के घरों पर कोहराम मचा रहा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
टाटा को 50 मीटर तक ढकेलते हुए पीछे ले गया
टक्कर मारने के बाद ट्राले की गति बहुत ही तेज थी। उसकी टक्कर से न केवल 40-40 साल पुराने पेड़ उखड़ गए, बल्कि वह टाटा 407 को भी 50 मीटर तक ढकेलता हुआ पीछे ले गया। टाटा 407 एक दुकान के सामने खड़े पेड़ से टकराकर रुक गई, लेकिन अनियंत्रित ट्राला तीन दुकान और पड़ों को भी उखाड़ते हुए आगे निकल गया। एक पेड़ भी ट्राले में फंसकर लगभग 50 मीटर तक गया। इस बीच ट्राले का अगला पहिला फट गया, जिससे वह रुक सका।
नींद या कुछ और
हादसा ट्राला चालक के सोने के कारण हुआ या उसकी तेज गति के कारण। पुलिस हादसे की वजह को स्पष्ट नहीं कर पा रही है। पुलिस इतना जरूर कह रही है कि मोड़ पर तेजी के कारण हादसा हुआ।
चालक चला रहा था ट्राला या हेल्पर?
ग्रामीणों का कहना है की ट्राले के चालक ने शराब पी रखी थी। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ट्राला कौन चला रहा था, चालक या हेल्पर। पुलिस का कहना है कि ट्राला सवार एक व्यक्ति हादसे के बाद भाग निकला। वहीं उसमें सवार बड़ौत निवासी चांद घायल हो गया। वह चालक है या हेल्पर अभी स्पष्ट नहीं है।
तो मंजर कुछ और ही होता
अगर हादसा लगभग एक घंटे बाद होता तो कई और की जान जा सकती थी। लोगों का कहना है जिस जगह हादसा हुआ है वहां लगभग चार बजे सब्जी मंडी लगनी शुरू हो जाती है। इससे काफी भीड़भाड़ रहती है। अगर मंडी के समय हादसा होता तो मंजर भी कुछ और ही होता।
लोग अस्पताल की ओर दौड़े
हादसे में एक युवक की मौत के बाद नंगली किठौर में कोहराम मच गया। मृतक सनी और घायलों के घरों में चीख पुकार मच गई। ग्रामीण अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। यही हाल असीलपुर का भी था। जैसे ही परिजनों और ग्रामीणों को अफजाल की मौत की खबर मिली तो मौके पर पहुंच गए। सभी का रो-रोकर बुरा हाल था।