सोशल मीडिया पर होने वाला अभद्र और गंदी भाषा का 88 प्रतिशत उपयोग ट्विटर पर होने संबंधी अध्ययन के आने के बाद ट्विटर की लॉ चीफ विजया गढ़े ने स्वीकार किया कि अपनी टीम तीन गुना बढ़ाने के बावजूद इस अभद्रता को जांचने की हमारी गति अक्षम्य रूप से धीमी है।
उन्होंने दावा किया कि इस समस्या की व्यापकता और पैमाना मापने को मान्यता ही नहीं मिली थी। कुछ लोगों द्वारा ट्विटर पर इस व्यवहार के विरोध में चलाए जा रहे कैम्पेन में कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया की यह साइट घिनौनी गालियों और अभद्रता का अड्डा बनकर रह गई है।
द वाशिंगटन पोस्ट में छपे एक लेख में सुश्री गढ़े ने कहा कि ट्विटर को इसके लिए स्थायी रूप से जांच करनी होगी, जिसमें कंपनी सफल नहीं हो पा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि अक्षम्य रूप से धीमी कार्रवाई के चलते हमारा रिस्पांस काफी कमजोर रहा है।
उन्होंने लिखा - विनम्रतापूर्वक मानना पड़ेगा कि हमारे उपाय पर्याप्त नहीं हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ध्यान रखते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को बोलने की स्वतंत्रता देते हुए हम ट्विटर पर अभद्र भाषा का उपयोग रोकने के लिए प्रयासरत रहेंगे।