पंजाब के बाद मथुरा में लगे मोतियाबिंद ऑपरेशन कैंप में भी कई मरीज आंखों की रोशनी गवां बैठे। पहले 12 मरीजों की आंखों की रोशनी जाने की खबर के बाद अब तीन और लोगों के साथ ऐसा ही हुआ है। उनका भी ऑपरेशन इसी संस्था की ओर से किया गया था। घटना के बाद से ही आरोपी संस्था का बोर्ड गायब हो गया है।
दरअसल बांकेबिहारी सेवा संस्थान के कैंप में झोलाछाप ने मोतियाबिंद के उल्टे-सीधे ऑपरेशन किए। पांच दिन बाद दोबारा जांच कराने मरीज पहुंचे तो संस्थान का कार्यालय बंद मिला। कैंप में गए फोन नंबर पर संपर्क करने पर झोलाछाप ने पीड़ितों को धमकाया। थाना सिकंदरा में पुलिस ने मथुरा का मामला बताकर रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया। मथुरा स्वास्थ्य विभाग शिकायत आने का इंतजार कर रहा है। समझा जा रहा है कि ऑपरेशन कराने वाले सभी 15 मरीज शिकायत दर्ज कराने और इलाज के लिए भटक रहे हैं।
मथुरा के धौलीप्याऊ, चंद्रपुरी में 22 नवंबर को बांकेबिहारी सेवा संस्थान की ओर से मोतियाबिंद ऑपरेशन कैंप का आयोजन किया गया था। संस्थान ने रिक्शा-आटो में लाउडस्पीकर लगवाकर इसका प्रचार कराया। इसमें नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. पीडी गौतम द्वारा दूरबीन विधि से मोतियाबिंद ऑपरेशन की बात की गई थी। मथुरा में रहने वालों ने आगरा, राजस्थान के अपने रिश्तेदारों को भी इसकी सूचना देकर बुला लिया कि यहां सस्ते में ऑपरेशन हो जाएगा।
ऐसे ही लोगों में आगरा के गढ़ी बाईंपुर के फौरन सिंह यादव (70), सोमवती देवी (72) और एत्मादपुर के गांव धौर्रा के सोमचंद (65) भी थे। इन्होंने इस कैंप में ऑपरेशन कराया। वहां बढ़िया लेंस के नाम पर पांच हजार और दवा के नाम पर हजार रुपये वसूले गए। मरीजों को दोबारा चेकअप के लिए 27 नवंबर को बुलाया गया। इस बीच इन तीनों की आंखों में रोशनी नहीं लौटी। ऐसी शिकायत अन्य मरीजों की भी रही। तय तिथि पर मरीज जांच कराने पहुंचे तो कार्यालय बंद मिला। बैनर भी गायब थे। सोमवती के बेटे सुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि ऑपरेशन के बाद से ही मां के तेज दर्द रहने लगा। खंदारी चौराहा स्थित निजी अस्पताल में आंखों की जांच कराई तो बताया गया कि यह गलत तरीके से किए गए ऑपरेशन का नतीजा है।