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सर्दियों में अन्नपूर्णा बेस कैंप पहुंचने वाली भारतीय बनीं तूलिका

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पर्वतारोही तूलिका रानी ने नेपाल की चोटी अन्नपूर्णा में बेस कैंप पहुंचकर बहादुरी का परिचय दिया है। तूलिका ने वहां तिरंगे के साथ अमर उजाला का बैनर भी फहराया। तूलिका का दावा है कि सर्दियों में माइनस 10 डिग्री के तापमान में अकेले दम पर अन्नूपर्णा बेस कैंप में पहुंचने वाली वह पहली भारतीय पर्वतारोही हैं।
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नेपाल की ऊंची चोटी अन्नपूर्णा के बेस कैंप की ऊंचाई 4,130 मीटर यानी 13,550 फीट है। यह दुनिया की दसवीं सबसे ऊंची चोटी है। सर्दियों में बेस कैंप तक ही चढ़ाई की जा सकती है।

आमतौर पर पर्वतारोही मौसम अनुकूल न होने के कारण गर्मियों में इस चोटी पर जाते हैं, लेकिन तूलिका ने सर्दी में इसे फतह किया। तूलिका ने बताया कि भारी बर्फबारी के कारण उन्हें बेस कैंप तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई।
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इससे पहले जब उन्होंने इस मौसम और नेपाल के वर्तमान हालात के बीच इस चोटी पर जाने का फैसला किया तो अधिकांश लोगों ने मना किया। सभी का यह मानना था कि नेपाल में राजनीतिक हालात भी ठीक नहीं है और सर्दी के मौसम में इस चोटी की चढ़ाई काफी मुश्किल है। तूलिका का कहना है कि उन्हें गर्व है कि उन्होंने देश के लिए यह गौरव हासिल किया।
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कई चोटियां कर चुकी हैं फतह

तूलिका रानी ने जुलाई 2015 में ईरान के दामावंद ज्वालामुखी पर तिरंगा फहराया था। इस कार्य के लिए अमर उजाला ने तूलिका को आर्थिक सहयोग भी दिया था। तूलिका इससे पहले माउंट एवरेस्ट सहित अन्य भारतीय ऊंची चोटियों पर चढ़ाई कर चुकी हैं। तूलिका रानी एयरफोर्स में स्कवैड्रन लीडर हैं।

चुनौती के लिए चुनी सर्दियां

जनवरी की सर्दियों में कोई भी पर्वतारोही पहाड़ों पर नहीं जाता, लेकिन इस मौसम में अन्नपूर्णा पर जाने का फैसला तूलिका ने अपने अभियान को और अधिक चुनौतीपूर्ण बनाने के लिए किया था।

बकौल तूलिका बहुत ठंड थी, स्नो कंडीशन थी। बिना किसी गाइड के 9 दिन की चढ़ाई खुद ही पूरी की। इस दरम्यान नदी, जंगल, पहाड़ खुद ही तय किया। खुद ही नक्शा देखकर रास्ता तय किया। 12 जनवरी से चढ़ाई शुरू की। 16 जनवरी को बेस कैंप में पहुंची।
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