मनरेगा में व्याप्त गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की कवायद शुरू कर दी है।
सरकार का इरादा मनरेगा कामगारों को स्मार्ट कार्ड देने का है ताकि मजदूरों की हाजिरी, काम का हिसाब और उनके भुगतान का पूरा ब्यौरा एक क्लिक पर उपलब्ध हो सके।
सरकार इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए मनरेगा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरबीएसवाई) स्मार्ट कार्ड से जोड़ने पर भी विचार कर रही है। जबकि निकट भविष्य में सभी फ्लैगशिप योजनाओं को जीपीएस प्रणाली से लैस करने की योजना बनाई गई है।
राष्ट्रीय संपादकों के सम्मेलन में अपर श्रम सचिव अनिल स्वरूप ने बताया कि गड़बड़ी रोकने के मकसद से सरकार मनरेगा कर्मचारियों की पहचान और ग्रामीण काम के भुगतान को आरबीएसवाई स्मार्ट कार्ड से जोड़ने की योजना को ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अपनी सहमति दे दी है।
वर्ष 2008 में शुरू आरएसबीवाई योजना 28 राज्यों के करीब 486 जिलों में फैली है। पिछले महीने तक आरएसबीवाई योजना के अंतर्गत पंजीकृत परिवारों की संख्या 3.42 करोड़ तक पहुंच गई है, जो मार्च 2009 में 40 लाख थी।
स्वरूप के मुताबिक आरएसबीवाई योजना के तहत बीमित व्यक्तियों को स्मार्ट कार्ड दिया जाता है। इसका उपयोग सालाना 30 हजार रुपये तक कैशलेस उपचार के लिये संबंधित व्यक्ति के पहचान के रूप में होता है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय फर्जी रोजगार कार्ड के मामलों को देखते हुए मनरेगा के तहत कर्मचारियों की पहचान, उसकी उपस्थिति और मजदूरी के भुगतान के लिए आरएसबीवाई कार्ड का उपयोग करना चाहता है। मनरेगा के लिए आरएसबीवाई कार्ड के उपयोग का पहला लाभ यह है कि इससे उपयुक्त तरीके से पहचान सुनिश्चत हो सकेगी।
उन्होंने बताया कि स्मार्ट कार्ड से मनरेगा के जुड़ जाने पर मजदूर बगैर कार्ड के कार्य स्थल में प्रवेश नहीं कर सकेगा। साथ ही कोई दूसरा व्यक्ति भी इसका उपयोग नहीं कर सकता है। सरकार का इरादा फ्लैगशिप योजनाओं में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) का उपयोग करने का है। जब व्यक्ति कार्ड स्वैप करेगा तब यह पता लग सकेगा कि वह कहां है। कहीं वह घर पर रहकर पैसा तो नहीं ले रहा है।