कुटिया पर चर्चा के दौरान छपरौली से रालोद के पूर्व विधायक डॉ. अजय तोमर, भाजपा नेता सतेन्द्र भराला, एडवोकेट इस्लाम मलिक, किरन सिंह भाटी, योगेश प्रधान, मनोज और नीरज जिटौली समेत कई लोग पहुंच जाते हैं। उनकी ज्यादा दिलचस्पी बागपत सीट को लेकर है।
मनोज जिटौली जहां मेरठ सीट पर नगमा के पक्ष में जाट वोटों के रुझान की बात करते हैं वहीं इस्लाम मलिक बताते हैं कि चुनाव भाजपा और बसपा के बीच हो सकता है। अगले कुछ दिनों में चुनावी मुद्दे हवा हो जाएंगे। जाति-धर्म के नाम पर वोटों का ध्रुवीकरण होगा।
चुनावी जंग में ग्लैमर का तड़का
मेरठ में लोकसभा चुनाव के लिए जोरदार जंग लड़ी जा रही है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सहयोगी जनरल शाहनवाज खान और मोहसिना किदवई जैसे नेताओं को संसद में पहुंचा चुकी इस सीट पर कांग्रेस ने फिल्म अभिनेत्री नगमा को मैदान में उतारकर चुनाव में ग्लैमर का तड़का लगा दिया है। पूरे क्षेत्र में कहीं झंडे, बैनर, होर्डिंग्स नजर नहीं आ रहे। इसका मतलब यह नहीं कि चुनावी माहौल शांत है।
कहीं भी जाइए हर जगह चर्चा सिर्फ प्रत्याशियों और पार्टियों को लेकर है। जाति और धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण के कयास लगाए जा रहे हैं। समीकरण उलझे लगते हैं लेकिन बातचीत में लोग अपने-अपने नजरिये से सब कुछ साफ-साफ बयां कर रहे हैं।
मेरठ लोकसभा सीट पर भाजपा ने मौजूदा सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, सपा ने कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, बसपा ने पूर्व सांसद और पूर्व मेयर शाहिद अखलाक तथा कांग्रेस ने अभिनेत्री नगमा को टिकट दिया है। आम आदमी पार्टी ने सोशल एक्टिविस्ट और किसानों की लड़ाई में सक्रिय रहने वाले रिटायर्ड मेजर डॉ. हिमांशु सिंह को मैदान में उतारा है।
अब्दुल्लापुर में अलग-अलग रंग
मेरठ-परीक्षितगढ़ रोड पर हयात सीमेंट एजेंसी के बाहर कई लोग बैठे हुए हैं। नफीस अब्बास कहते हैं, पहले भाजपा स्ट्रांग थी लेकिन राष्ट्रीय और लोकल लेवल पर गुटबंदी से उसे नुकसान हो गया। जाफर अली नकवी कहते हैं, मेरठ में भाजपा नंबर तीन पर है।
मुकाबला शाहिद मंजूर और शाहिद अखलाक के बीच है। मुसलमानों का रुझान सपा की तरफ ज्यादा है। पंडित, जाट और मुसलमानों का एक वर्ग नगमा की ओर भी जा रहा है। अब्दुल्लापुर के ही खिरनी मोहल्ले के जमालुद्दीन और खलील अहमद कहते हैं कि उनके गांव में मेवाती मुसलमानों के 250 वोट भाजपा को जाएंगे।
मुस्लिमों का ज्यादा रुझान शाहिद मंजूर और शाहिद अखलाक के पक्ष में हैं लेकिन दलित बसपा को ही वोट दे रहे हैं।
यंगस्टर बोले नमो-नमो
गढ़ रोड पर सिसौली अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त महिला पहलवान अलका तोमर का गांव है। इस इलाके में ठाकुरों के 12 गांवों को बारहा कहा जाता है। कस्बानुमा इस गांव में बीके भारद्वाज ज्योतिष कार्यालय के बाहर बड़ के पेड़ के नीचे आठ-दस नौजवान खड़े हैं। पूछने पर कहते हैं कि पूरे बारहा में मोदी का जोर है।
बीकॉम के छात्र अंतिम तोमर, संदीप, दिव्यांश और मोहन सिंह कहते हैं, प्रत्याशी बड़ा मुद्दा नहीं है, वोट पार्टी और मोदी को जा रहे हैं। इसी गांव के बुजुर्ग नूर मोहम्मद सपा और भाजपा में मुकाबला देखते हैं।
गांव में क्षत्रिय युवा महासभा के उपाध्यक्ष नरेश तोमर मानते हैं कि मोदी लहर का असर है लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदर पाल सिंह द्वारा कराए गए विकास कार्यों और मंत्री शाहिद मंजूर से नजदीकी संबंधों के चलते सपा को भी ठीक-ठाक वोट मिलेंगे। वे खुद सपा से जुड़े हैं। वह कहते हैं कि दलितों का रुझान बसपा की तरफ है।
सांसद से नाराज, फिर भी देंगे वोट
मेरठ से करीब 18 किमी दूर किठौर रोड पर भटीपुरा जाट बहुल गांव है। गांव के जयवीर काजला पराग दुग्ध उत्पादक संघ के डायरेक्टर हैं। कहते हैं, भाजपा सांसद राजेन्द्र अग्रवाल से लोग ज्यादा खुश नहीं हैं। उन्होंने काम नहीं किया, किसी के सुख-दुख में शरीक नहीं हुए।
उनका जनसंपर्क भी कमजोर है, बावजूद इसके गांव ही नहीं आसपास के लोग भी मोदी के नाम पर भाजपा को वोट दे रहे हैं। वे भाजपा और बसपा के बीच मुख्य चुनावी मुकाबला आंक रहे हैं। हालांकि उनके पास ही बैठे सतेन्द्र सिंह कहते हैं कि वे नगमा को वोट देंगे और दिलवाएंगे भी।
इसी गांव के राजवीर सिंह भाजपा का पलड़ा भारी होने का जिक्र करते हुए कुछ दलितों के वोट कमल को जाने का दावा करते हैं। दलित भूषण और पप्पू तत्काल कहते हैं कि दलितों का एक-एक वोट भाजपा को जाएगा।
प्रत्याशी नहीं, मोदी का असर
मेरठ-खरखौदा रोड पर जुर्रानपुर गांव में गुर्जर आबादी काफी है। गांव में एडवोकेट जबर सिंह के निवास पर कई लोग बैठे हुए हैं। सबकी सोच भी अलग-अलग। सभी गन्ना मूल्य भुगतान न होने, सड़कें खराब होने का जिक्र करते हैं। बिजेन्द्र सिंह कहते हैं कि मन तो भाजपा को वोट देने का बना हुआ है। लेकिन सपा प्रत्याशी के ताल्लुक भी लोगों से ठीक हैं
वह कहते हैं, यहां जो भी असर है मोदी का है, प्रत्याशी का नहीं। कुलदीप सिंह को शिकायत है कि सांसद राजेन्द्र अग्रवाल पांच साल में एक बार भी गांव में नहीं आए। हालांकि वह उन्हीं के चुनाव जीतने की बात कहते हैं। युवा सचिन कहते हैं, मिला-जुला माहौल है।
शाहिद अखलाक दलित-मुस्लिम समीकरण के आधार पर भाजपा से मुकाबला कर सकते हैं। हालांकि जबर सिंह निजी ताल्लुकात की वजह से शाहिद मंजूर को हर जाति के कुछ वोट जाने का अनुमान लगाते हैं।
गोलाकुआं बना चौपाल
मेरठ शहर में गोलाकुआं राजनीति का सेंटर कहा जाता है। इस मुस्लिम बहुल क्षेत्र में रात को साढ़े दस बजे भी काफी लोग चुनावी चर्चा में मशगूल मिलते हैं। अब्दुल हकीम कहते हैं, अभी तो चुनाव का पता नहीं लग रहा। नगमा के अलावा कोई यहां आया भी नहीं।
गोलाकुआं से इस्लामाबाद मोहल्ले की तरफ जाने वाली रोड की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं, कोई आएगा भी कैसे, एक महीने से सड़क खुदी पड़ी है। अल्ताफ अहमद मुस्कुराहट के साथ कहते हैं, यहां तो नगमा छा रही हैं। एडवोकेट तबरेज आलम कहते हैं. कांग्रेस दयानंद गुप्ता का टिकट न बदलती तो चुनावी माहौल अलग होता।
नगमा के आने से समीकरण बदले हैं। वे बताते हैं कि अभी मुस्लिमों का रुझान साफ नहीं है। अगले कुछ दिनों में तस्वीर साफ होगी।