देश की राजधानी में शीर्ष सत्ता की नाक के नीचे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके मंत्री अमित मित्रा पर युवा वामपंथी संगठन एसएफआई के कार्यकर्त्ताओं ने हमला किया।
इस घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बदले की कार्रवाई करते हुए राज्य में कई जगहों पर वाम दलों के कार्यालय में तोड़फोड़ की।
देश की राजधानी में शीर्ष सत्ता की नाक के नीचे ममता और उनके मंत्री अमित मित्रा पर युवा वामपंथी संगठन एसएफआई के कार्यकर्त्ताओं ने हमला किया।
मुलाकात रद्द
ममता के साथ धक्का-मुक्की की गई और उनके वित्त मंत्री अमित मित्रा के साथ बदसलूकी करते हुए उनका कुर्ता तक फाड़ दिया गया। ममता के शहरी विकास मंत्री फरहाद हाकिम के साथ भी हाथपाई की गई।
इस हमले से नाराज ममता का गुस्सा योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया के सामने ही फूट पड़ा।
उन्होंने पर्याप्त सुरक्षा नहीं देने को लेकर केंद्र सरकार पर तीर चलाए और दुबारा दिल्ली न आने धमकी दे डाली। इतना ही नहीं ममता ने गुस्से में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मुलाकात तक रद्द कर दी।
फट गया कुर्ता
ममता अपने मंत्रियों को साथ लेकर राज्य की वार्षिक योजना की चर्चा करने आई थीं। यह खबर माकपा की छात्र इकाई एसएफआई के लोगों को लग गई।
बीते दिनों पश्चिम बंगाल में अपने कार्यकर्ता सुब्रत मुखर्जी की मौत से गुस्साए प्रदर्शनकारियों के समूह ने तीनों नेताओं की कार को घेर लिया।
इस दौरान पुलिस ने दोनों नेताओं को कार से न उतरने की सलाह दी, लेकिन इसकी परवाह न करते हुए ममता कार से उतर गईं। इनके कार से उतरते ही प्रदर्शनकारियों ने धक्कामुक्की शुरू कर दी। उनकी धक्का-मुक्की और हाथापाई में अमित मित्रा का कुर्ता फट गया।
गुस्से में ममता
संसद भवन से महज चंद मीटर की दूरी पर स्थित योजना भवन के पास हुई इस घटना से तिलमिलाई ममता बनर्जी ने न केवल वाम दलों को खरी खोटी सुनाई, बल्कि योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया और उन्हें समझाने आए केंद्रीय योजना राज्य मंत्री राजीव शुक्ला से भी उलझ पड़ीं।
कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हुए आपे से बाहर हुई ममता ने पहले तो दोबारा दिल्ली न आने की धमकी दी, फिर प्रधानमंत्री से तय महत्वपूर्ण मुलाकात तबीयत ठीक न होने की बात करते हुए टाल दिया। बताया गया कि उनका ब्लड प्रेशर लो हो गया है।
गरमाया सियासी तापमान
राज्य में अगले ही महीने संभावित पंचायत चुनाव के कारण इस घटना ने सियासी तापमान को गरम कर दिया है। धक्का मुक्की की घटना के बाद हालत यह थी कि योजना भवन के प्रथम तल पर लगभग 15 मिनट तक आपे से बाहर हुई ममता के ही आवाज गूंज रहे थे।
इस दौरान आहलूवालिया और शुक्ला उन्हें समझाने में न केवल नाकाम साबित हो रहे थे, बल्कि उन्हें ममता के तीखे हमलों से बचाव करना मुश्किल हो रहा था। ममता ने आहलूवालिया को निशाने पर लेते हुए कहा कि यही आपकी सुरक्षा है? आपके यहां मेरे मंत्री की पिटाई होती है।
आहलूवालिया ने जताया खेद
यहां बहुत असुरक्षा है, ऐसे में तो मैं दिल्ली आना छोड़ दूंगी। समझाने के क्रम में आहलूवालिया ने इस घटना के लिए कई बार खेद भी जताया। बाद में किसी प्रकार ममता बैठक में शामिल हुईं।
हालांकि बैठक के बाद उन्होंने पुराना आक्रामक तेवर अपना लिया और वाम दलों को असभ्य करार देते हुए कहा कि वह भी दस लाख लोगों को दिल्ली ला सकती हैं।
भड़की ममता ने कहा...
- वे मुझे और मेरे मंत्री को मार रहे थे। वे मुझे तभी रोक सकते हैं जब मेरी जान ले लें। देखिए उन्होंने मेरे मंत्री अमति मिश्रा से कैसे बदसलूकी की।
- यह प्लानिंग कमीशन का दफ्तर है या सिसायत का मैदान। ये भीड़ यहां क्या कर रही है। यह हमला संविधान का उल्लंघन है।
- राजनीतिक मतभेद होते हैं, लेकिन हर चीज की एक सीमा होती है। वे माकपा के लोग थे।
- दिल्ली पुलिस क्या कर रही थी? वे हमें सुरक्षा तक नहीं मुहैया करा सकते। ऐसी गुंडागर्दी होती रही तो हम आगे से यहां नही आएंगे।
- अगर सिर्फ विरोध दर्ज कराने की बात है तो मैं केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने पश्चिम बंगाल से दस लाख लोग दिल्ली ला सकती हूं।