फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किस हद तक तबाह हुआ नेपाल, जानिए छुपी हुई हकीकत

विज्ञापन
विज्ञापन
काठमांडू से लेकर भूकंप का केंद्र लामजुंग और पोखरा के आस-पास तक के गांवों में कुछ नहीं बचा है। गांवों में 90 प्रतिशत से अधिक मकान मलबे में तब्दील हो गए हैं और भूकंप से आई तबाही की असल तस्वीर अभी मलबे में दबी है। राहत एवं बचाव कार्य काठमांडू में चल रहा है और वह भी जरूरत के लिहाज से बहुत कम है। अभी तक मरने और घायल होने वालों का सही आंकड़ा नहीं आ पाया है।
विज्ञापन


गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों में तो राहत एवं बचाव सेवाएं अभी तक नहीं पहुंची हैं । चिकित्सकों, दवाओं की कमी तो है ही, मूलभूत सुविधाओं की भी काफी कमी महसूस हो रही है। खाने-पीने का सामना और कई इलाकों में इसकी उपलब्धता भी बड़ी चुनौती है। लोगों के पास कुछ नहीं बचा है। जिनके मकान कच्चे हैं, वह धराशायी हो चुके हैं। उनके पास जो भी खाने-पीने का सामान था, वह भी मलबे के नीचे दबा है।

हजारों लोग अभी अपने परिजनों और रिश्तेदारों की तलाश में मारे-मारे फिर रहे हैं। यहां तक कि काठमांडू में भी बिजली, पानी और संचार की सेवाएं बहाल नहीं हो पाई हैं। भूकंप को लेकर लोगों की स्थिति यह है कि वह दहशत के मारे घरों में रहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। कुछ भी हो रहा है तो लोगों को भूकंप आने का अंदेशा हो रहा है। इसलिए बड़ी आबादी खुले आसमान के नीचे रह रही है। ऐसे में टेंट की भारी कमी महसूस हो रही है। इस समय सबसे बड़ी जरूरत काठमांडू के अलावा बाहर भी ध्यान की है।
विज्ञापन

(यामी नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बाबू राम भट्टराई की पत्नी हैं।)

नेपाल में तबाही, 12 जिले एकदम बर्बाद

नेपाल में भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। 73 जिलों में से 30 जिले प्रभावित हुए हैं और इनमें से 12 जिलों की दशा बहुत दयनीय है। भूकंप में मरने या घायल होने वालों के बारे में किसी के पास कोई सही आंकड़ा नहीं है। शहर से ज्यादा तबाही गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों में हुई है। तमाम स्थानों पर राहत एवं बचाव दल भी नहीं पहुंच पाए हैं। इसलिए नुकसान और तबाही का आकलन करने में अभी करीब चार-पांच दिन लग सकते हैं।

जबकि सही तस्वीर धीरे-धीरे सामने आएगी। तबाही काफी हुई है। रास्ते बंद हैं। सड़कें कट गई हैं। लोग अभी भी इस तबाही से बदहवासी की स्थिति में हैं। राहत एवं बचाव कार्य में संतुलन बिठाना कठिन हो रहा है।  ऐसे में प्रभावित क्षेत्र को लोगों के रहने लायक बनाने में भी काफी समय लगेगा।

काठमांडू और अन्य स्थानों पर घायलों का इलाज चल रहा है, लेकिन दवा, अस्पताल और डॉक्टरों की भारी कमी है। हालांकि भारतीय चिकित्सा दल यहां पहुंचकर लोगों का इलाज कर रहा है। तमाम अस्थायी अस्पताल खोले गए हैं, लेकिन इसकी तुलना में जरूरतमंदों की तादाद काफी अधिक है। खाने-पीने के सामान समेत अन्य की भी यही स्थिति है।

लोगों के दिलों में उतरा भारत
सेना, अर्धसैनिक बल, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और कुछ निजी स्तर पर भी किए गए प्रयासों ने नेपाल के लोगों का दिल जीत लिया है। भारत की टीमें न केवल सबसे पहले यहां आई, बल्कि  जो नेपाल के भूकंप प्रभावितों को चाहिए था, वह साजो-सामान, उपकरण, राहत सामग्री लेकर आई और जी-जान से जुट गई हैं। काठमांडू के बाहर भी शिविर लगाए गए हैं। जहां तक संभव हो रहा है, लोगों को बचाने, मलबे से निकालने, सामान्य सुविधाओं की बहाली, घायलों का इलाज किया जा रहा है।
(कमल किशोर, सदस्य, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण)
विज्ञापन

खुले मैदान में बिना सुविधाओं के चल रही है सांसें

काठमांडू ही नहीं नेपाल के 20 के करीब जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लोग अपने घरों के बाहर या तो खुले आसमान में रह रहे हैं या फिर घर से दूर कहीं तंबुओं में। वह जहां रह रहे हैं, वहां भी खाने-पीने के सामान से लेकर मूलभूत सुविधाओं की कमी है।

बिजली, पानी से लेकर शौचालय तक की कमी का लोग सामना कर रहे हैं। काठमांडू से बाहर निकलकर गांवों की तरफ की स्थिति तो और भी खराब है। वहां दुकानों आदि पर भी सामान नहीं हैं।

जो लोग बच गए हैं, उनके सामने आगे की जिन्दगी काफी कठिन दिखाई दे रही है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का भी मुख्य ध्यान काठमांडू और आस-पास के जिलों में ज्यादा है, जबकि असल की तबाही गांवों में आई है।
(प्रमोद काफले, मानवाधिकार कार्यकर्ता)
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें