आखिरकार सोमवार रात को रुद्रपुर के लक्ष्मीपुर गांव में बादल बरस पड़े। जिससे बारिश नहीं होने से भगवान से नाराज किसान गौरीशंकर ने अनशन तोड़ कर अन्न ग्रहण कर लिया।
इससे पूर्व तीन दिन अन्न जल त्यागने से उनकी हालत बिगड़ने लगी तो प्रशासन को भी हरकत में आना पड़ा था। सोमवार को नायब तहसीलदार डॉक्टर और एंबुलेंस को लेकर उनको मनाने गए थे, लेकिन उन्होंने एक न सुनी।
बहुत मनुहार के बाद एक घूंट नारियल पानी पिया। उनकी हालत देख डॉक्टर उन्हें लेकर पहले रामलक्षन पीएचसी और फिर गौरीबाजार पहुंचे। डॉक्टरों ने उनकी हालत खराब बताई तो शाम को उन्हें देवरिया रेफर कर दिया गया। आखिरकार रात में झमाझम बारिश होने पर उन्होंने अपने हठ को छोड़ कर अन्न को ग्रहण किया।
सूख रही थी फसल, लोग हो रहे थे बीमार
सोमवार को आधी रात से शुरू बारिश सुबह छह बजे तक होती रही है। उनके अन्न ग्रहण करने से गांव के लोग खुशियां मना रहे हैं। गांव में भजन कीर्तन का कार्यक्रम शुरू हो गया है।
इससे पहले भी गौरीशंकर ऐसा कर चुके है। उन्हें पूरा विश्वास था कि भगवान पानी जरूर बरसाएंगे। रुद्रपुर क्षेत्र में बारिश नहीं होने से खेत में धान की फसल सूख रही थी। गर्मी और उमस इतनी थी कि लोग बीमार हो रहे थे।
रविवार और सोमवार को तो गर्मी अपने चरम सीमा पर पहुंच गई। जिससे गौरीशंकर भगवान से नाराज हो गए और गांव के प्राइमरी स्कूल के पीपल के पेड़ के नीचे अनशन शुरू कर दिया था। गांव वालों के मनाने पर भी वह नहीं माने उनके हठ के आगे प्रशासन की एक नहीं चली।
गौरीशंकर को काफी सम्मान देते हैं गांववाले
गौरीशंकर का गांव में काफी आदर भाव है। वह कोई संत नही बल्कि मामूली किसान हैं, लेकिन अपने कर्म को शिद्दत से करते हैं। लक्ष्मीपुर के चंद्रभान ने बताया कि उनके परिवार का भरण पोषण खेती से होता है। पांच कट्ठा निजी जमीन के अलावा अधिया पर खेती करते हैं।
पुल्लु निषाद ने बताया कि गौरीशंकर इससे पहले भी बारिश के लिए अनशन कर चुके हैं। 10 वर्ष पहले भी सूखा पड़ा था उस समय गौरीशंकर नौ दिन अन्न जल त्याग दिया था। उसके बाद मूसलाधार बारिश हुई थी।
दुर्गावती देवी ने कहा कि गौरीशंकर गांव में बराबर अपनी धुन में रहते हैं। उनका पूरा समय खेत में बीतता है। गांव वाले हालांकि उनकी अवस्था को देखते हुए हठ करने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी।
अब भगवान ने पूरे गांव की सुन ली है। इससे पूरा गांव प्रसन्न है। कपिल देव ने बताया कि गौरीशंकर के अनशन करने से गांव के लोग उनकी जान बचाने को प्रार्थना कर रहे थे। अब पूरा गांव भगवान के भजन कीर्तन में जुटा है।