प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह कम से कम किताबों पर चर्चा के मामले में तो भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से आगे दिख रहे हैं।
लोकसभा के महासंग्राम के दौरान मनमोहन सिंह पर केंद्रित दो ही किताबों से खासा सियासी विवाद हो गया है, जबकि मोदी कर लिखी किताबें गुमनामी में खो गई हैं।
इन किताबों को ज्यादातर भाजपा के नेता खासतौर पर पार्टी के प्रत्याशी ही खरीद रहे हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में बांट रहे हैं।
मोदी की किताबों की नहीं है चर्चा
मोदी पर वर्ष 2014 का कैलेंडर पहले आ चुका है। अशोक रोड स्थित पार्टी मुख्यालय के बुक स्टोर में मोदी पर लिखी ज्यादातर किताबें मौजूद हैं। मोदी पर अब तक लगभग दो दर्जन किताबें बाजार में आ चुकी हैं और लगभग इतनी ही और किताबें आने को तैयार हैं।
लेकिन इनमें से एक भी किताब देशव्यापी सुर्खियां नहीं बटोर पाई है। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू की ‘द एक्सीडेटल प्राइम मिनिस्टर’ तथा पूर्व कोयला सचिव पीसी पारिख की ‘क्रूसेडर ऑर कांस्पीरेटर’ से विवाद हो गया है।
इसकी एक वजह यह मानी जा रही है कि इनमें मोदी का गुणगान भर है।
गरीबी से मोदी का संघर्ष किताब का दावा
एम बी कामथ और कालिंदी रंडेरी की लिखी पुस्तक ‘विकास शिल्पी -नरेंद्र मोदी’ वैसे तो जवाहरलाल नेहरु संग्रहालय की लाइब्रेरी समेत ज्यादातर पुस्तकालयों में देखी जा सकती है। इसमें मोदी का जीवनवृत है।
पत्रकार विष्णु गुप्त की लिखी ‘नरेंद्र मोदी- 21वीं सदी का नायक’ किताब में उनके हिदुत्व रूप को दिखाया गया है। इसमें गोधरा कांड की अनदेखी पर प्रबुद्ध वर्ग की खिंचाई की गई है।
पत्रकार सुदेश वर्मा की ‘नरेंद्र मोदी- द गेमचेंजर’ में मोदी के संघर्ष की गाथा है, इसमें बताया गया है कि कैसे गरीबी से संघर्ष करते हुए मोदी आज देश की सियासत में गेमचेंजर बन गए हैं।
मोदी पर किताबें लिखने का दौर
इनके अलावा धनंजय कुमार की ‘द नरेंद्र मोदी’ व हरीश चंद्र वर्णवाल की ‘मोदी मंत्र’ तथा महेंद्र कुमार की ‘नरेंद्र मोदी-संघर्ष से शिखर तक’ और किशोर मकवाणा की ‘कॉमन मैन -नरेंद्र मोदी’ व ‘कहानी नरेंद्र मोदी की’ समेत कई पुस्तकें आ चुकी हैं।
मकवाणा ने मोदी-चितंन व सामाजिक समरसता का संपादन भी किया है। इनके साथ ही ज्योति पुंज, सामाजिक समरसता, आपातकाल में गुजरात व सेतुबंध भी हैं जिनके लेखक मोदी हैं।
प्रगति पुरुष तथा साजिश की कहानी-तथ्यों की जुबानी जैसी किताबें भी बाजार में आ चुकी हैं। इसके अलावा कॉमन मैन नरेंद्र मोदी, नमोवाणी, मोदी का विकासनामा, मुक्ति की आशा-नरेंद्र भी उपलब्ध हैं।