भारत बंद के दौरान एक बार फिर तीसरे मोर्चे के गठन की तस्वीर उभरी है। दरअसल, गैर कांग्रेस और गैर भाजपा दलों के तीसरे मोर्चे की तस्वीर मुलायम सिंह की अगुवाई में न सिर्फ दिखाई दी है, बल्कि सुनाई भी दी है। माकपा महासचिव प्रकाश करात से लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने खुलकर मुलायम सिंह को तीसरे मोर्चे की अगुवाई करने की पेशकश की है।
संसद मार्ग पर वामदलों के शीर्ष नेता प्रकाश करात, एबी बर्धन, सीताराम येचुरी, टीडीपी नेता चंद्र बाबू नायडु और जनता दल सेक्यूलर नेता एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस के साथ मुलायम सिंह ने कंधे से कंधा मिलाकर यूपीए सरकार के खिलाफ तीसरे मोर्चे की भावी तस्वीर का आईना दिखाया, मगर यूपीए सरकार से समर्थन वापसी पर चुप्पी साधकर मुलायम ने दोहरी सियासत का खेल भी जारी रखा।
इस सियासी मोड़ पर मुलायम सिंह तीसरे मोर्चे के विकल्प को किसी भी सूरत में बंद करना नहीं चाहते। इसलिए खूब बढ़ चढ़कर इसके विचार को आकार देने में जुटे हुए हैं। साथ ही उन्होंने भाजपा से भी दूरी बना कर रखी है। धरने प्रदर्शन के दौरान उन्होंने भाजपा के साथ मंच साझा करने से परहेज किया, जबकि वामदल के नेता भाजपा नेताओं के साथ नजर आए।
मुलायम सिंह से जब पूछा गया कि क्या अब तीसरे मोर्चे का उदय होगा, तो उनका जवाब था कि इस बंद से बड़ा उदाहरण और क्या होगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विकल्प चुनने के लिए व्यापक विरोध से बेहतर कोई उदाहरण नहीं है। वैसे मुलायम सिंह पिछले दिनों पार्टी के कोलकाता सम्मेलन में कह चुके है कि वह चुनावों के बाद ही तीसरे मोर्चे के गठन के पक्ष में है। वह लोकसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेंगे।