आम चुनाव के ठीक पहले जोरशोर से गठित गैर कांग्रेस-गैर भाजपा विरोधी दलों के मोर्चे की गतिविधियां मतदान का 8वां चरण खत्म हो जाने के बावजूद शांत दिख रही है।
मगर मोर्चे में शामिल दल भाजपा और उसके पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को सत्ता में आने से रोकने के लए हर दांव आजमाने के लिए बेकरार हैं।
दांव आजमाने से पहले इनकी निगाहें नतीजों के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों के प्रदर्शन पर टिकी हैं।
हक में आए नतीजे तभी होगी तीसरे मोर्चे की बैठक
अगर मतगणना के बाद भाजपा और पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए जरूरी आंकड़ा हासिल होने की संभावना दिखी, तभी मोर्चे में शामिल नेता एकाएक सक्रिय होंगे।
फिलहाल मोर्चे के नेताओं ने नतीजा आने से पहले बैठक बुलाने की योजना भी टाल दी है।
हालांकि वाम दलों की योजना मोदी को सत्ता में आने से रोकने के लिए उन दलों को भी साथ लाने की है जिनका मोर्चे में शामिल दलों से छत्तीस का आंकड़ा है।
ममता, माया, जयललिता, केजरीवाल को भी होगी मनाने की कोशिश
बीते दिनों भाकपा के वरिष्ठ नेता एबी बर्धन का मोर्चे में वाम दलों की धुर विरोधी तृणमूल कांग्रेस को शामिल करने पर कोई एतराज न होने और माकपा महासचिव प्रकाश करात का मोर्चे में आम आदमी पार्टी का स्वागत करने संबंधी बयान इसी ओर इशारा करते हैं।
इनकी निगाहें उन सभी क्षेत्रीय दलों के प्रदर्शन पर भी टिकी हैं जो फिलहाल राजग में शामिल नहीं हैं तो उन दलों पर भी टिकी हैं जो भाजपा के साथ रहते हुए भी ऐन मौके पर पाला बदल सकते हैं।
इनका मानना है कि मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस तीसरा मोर्चा को समर्थन देने में आनाकानी नहीं करेगी।
वाम दलों को यकीन, केंद्र में भाजपा की सरकार नहीं
भाकपा सचिव अतुल अंजान ने मोर्चे की भावी रणनीति के संबंध में पूछे जाने पर बताया कि फिलहाल सभी को नतीजे का इंतजार है।
नतीजा आने के बाद ही मोर्चे के नेताओं की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि वाम दलों को अब भी यकीन है कि केंद्र में भाजपा की अगुवाई में सरकार नहीं बनने जा रही।
इसलिए नतीजे आने के बाद मोर्चे के नेता भावी रणनीति तय करने के लिए बैठक करेंगे।
नतीजे के बाद क्षेत्रीय दलों के साथ संपर्क का सिलसिला तेज होगा
उधर माकपा के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि फिलहाल मोर्चे में शामिल सभी नेताओं का सारा ध्यान मतदान पर होने और नतीजे के प्रति भ्रम रहने के कारण नतीजा आने से पहले बैठक बुलाने का फैसला टाल दिया गया है।
उक्त नेता ने बताया कि फिलहाल भले ही सरकार बनाने की दिशा में पूर्व रणनीति बनाने जैसा कुछ नहीं हो रहा, मगर उनकी नजरें मोर्चे के इतर गैर भाजपा-गैर कांग्रेस दलों के प्रदर्शन पर टिकी है।
अगर भाजपा को सत्ता में बाहर रखने के लिए जरूरी संख्या बल जुटने की उम्मीद बंधी तो क्षेत्रीय दलों के साथ संपर्क साधने का सिलसिला तेज हो जाएगा।
राहुल पर तीसरे मोर्चे के समर्थन का दबाव
उधर भले ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बहुमत न मिलने पर विपक्ष में बैठने की बात कर रहे हैं, मगर जदयू और सपा नेताओं का मानना है कि भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस तीसरे मोर्चे को हर हाल में समर्थन देगी।
इस संबंध में जदयू के वरिष्ठ नेता अली अनवर अंसारी ने कहा कि नतीजे घोषित होने दीजिए, जरूरत पड़ी तो सांप्रदायिकता के खिलाफ राजनीति करने वाले सभी दल एक मंच पर खड़े नजर आएंगे।