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पाकिस्तान में बन रहे हैं सैनिक शासन के हालात

Tue, 15 Jan 2013 11:24 PM IST
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
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दिन ब दिन नाजुक हो रहे राजनीतिक हालात के चलते पाकिस्तान में एक बार फिर सैनिक शासन की स्थिति बनती जा रही है। हालांकि नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पाक सेना की हरकतों से उपजे तनाव के बीच पाकिस्तान के बदलते अंदरूनी हालात पर सरकार की पैनी नजर है।
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हालांकि सरकार ने साफ संकेत दिया है कि पाकिस्तान में बदलते राजनीतिक परिवेश का असर भारत के कड़े रुख पर नहीं पड़ेगा। भारत-पाक संबंधों से जुड़े विशेषज्ञों और पूर्व राजनयिकों की भी यही राय है कि एलओसी पर पाकिस्तान की बर्बर करतूतों की प्रतिक्रिया में सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कड़े कदमों को पीछे नहीं खींचना चाहिए।

रणनीतिक विशेषज्ञ और खुफिया विभाग आईबी के पूर्व निदेशक अजीत डोभाल ने अमर उजाला से कहा कि वैसे तो वहां के प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ को गिरफ्तार करने का पाक सुप्रीम कोर्ट का आदेश उनका अंदरूनी मामला है। मगर भारत के लिए चिंता का विषय यह है कि शिया नेता कादरी के दबाव और प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी के आदेश से उपजे नाजुक हालात का फायदा जनरल कियानी उठा सकते हैं।
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कियानी इस साल रिटायर होने वाले हैं। इसलिए इस संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता है कि जनरल कियानी पाकिस्तान की सत्ता को अपने हाथ में लेकर अपने कार्यकाल को बढ़ाने का ऐलान कर दें। ऐसे में भारत सरकार को वहां के हालात पर नजर रखने के साथ अपने कड़े रुख पर कायम रहने की जरूरत है। वरना पहले से अपने कुकृत्यों के प्रति इनकार की मुद्रा में खड़ी पाकिस्तानी सेना और उपद्रव कर सकती है।

पूर्व विदेश सचिव सचिव शशांक ने भी डोभाल से सहमति जताते हुए कहा कि पाकिस्तान के अंदरूनी हालात हमेशा इसी तरह अस्थिर रहते हैं। ऐसे में भारत को अपनी नीति में पाकिस्तान के मुताबिक बदलाव करना उचित नहीं होगा।

शशांक के मुताबिक कूटनीति का यही तकाजा है कि भारत एलओसी की घटना के पर अपने कड़े रुख पर कायम रहे। हालांकि शशांक ने यह भी कहा कि सरकार और सेना को अपने-अपने स्तर पर बातचीत भी जारी रखना चाहिए क्योंकि हम इस सच्चाई को बदल नहीं सकते कि पाकिस्तान भौगोलिक लिहाज से पड़ोसी है।

भारत-पाक रिश्तों के सामरिक विशेषज्ञ मारुफ रजा के मुताबिक पाकिस्तान के पूर्व सैनिक शासक परवेज मुशर्रफ को बर्खास्त करने के बाद वहां का सुप्रीम कोर्ट नया पावर सेंटर बन कर उभरा है। अब उसने जनता के चुने प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी का आदेश दिया है। वहां की सेना के साथ अब इस नए पावर सेंटर का उभरना भारत के लिए चिंता का विषय है।

पाकिस्तान के इतिहास को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि चुनी हुई सरकार के खतरे में पड़ने से सैनिक शासन अपना कब्जा जमाएगा। खास तौर पर जनरल कियानी की मंशा भांपना अभी बहुत मुश्किल है। मारूफ रजा के मुताबिक भारत के रणनीतिकारों को यह ध्यान में रखना होगा कि परवेज मुशर्रफ के जाने के बाद कियानी की एक नजर लगातार भारत पर बनी हुई है।
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