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मोदी पर विपक्ष का हल्ला बोल, इन मुद्दों पर घिरेगी सरकार

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भूमि अधिग्रहण समेत चार महत्वपूर्ण बिलों पर सरकार की संसद में मुश्किलें कम होने की बजाय, बढ़ने जा रही हैं। सोमवार से शुरू होने वाली संसद की कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने उसे चारों ओर से घेरने के लिए कमर कस ली है। खासतौर पर राज्यसभा में विपक्ष उग्र तेवर अपनाने जा रहा है।
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मुश्किल इस वजह से भी है कि पूरा विपक्ष इन सभी मुद्दों पर एक जुट हो गया है। ऊपर से जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद की ओर से अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई और रोक के बावजूद बीबीसी की ओर से प्रसारित की डाक्यूमेंट्री के मामले ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

विपक्ष ने इन मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की तैयारी कर रखी है। कांग्रेस राज्य सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गलत तथ्यों को पेश करने के लिए विशेषाधिकार हनन का मामला लाने की भी तैयारी में है।
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संसद में सरकार पर भारी रहेगा यह हफ्ता

वहीं श्रीलंकाई प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की ओर से भारतीय मछुआरों को गोली मारने के दिए गए बयान पर जेडीयू ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है, जिसमें उसे अन्नाद्रमुक का समर्थन मिलेगा।

इसके अलावा राज्य सभा में सोमवार को खान एवं खनन बिल भी सरकार की ओर से पेश किया, जिसके खिलाफ माकपा ने मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है।

सोमवार को सरकार संशोधित भूमि अधिग्रहण बिल लोकसभा में पारित करने के लिए रखेगी। विपक्ष की छोड़िए सरकार के सामने अब तक अपने ही घटक दलों को इस बिल को लेकर मनाने की चुनौती है।

सूत्रों का कहना है कि सरकार ने लोक जनशक्ति पार्टी, शिरोमणि अकाली दल को तो मना लिया है, लेकिन महाराष्ट्र में तवज्जो नहीं मिलने के चलते शिवसेना अब तक नाराज बैठी है। शिवसेना को मनाने की जिम्मेदारी नितिन गडकरी को दी गई है।
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बीमा कोयला बिल पर भी घिरेगी सरकार

लोकसभा में विपक्ष बिल को लेकर सरकार को घेरने की पूरी कोशिश करेगा, लेकिन बहुमत नहीं होने के चलते वह उसे पास कराने से नहीं रोक पाएगा। लोकसभा में बेमौसम बरसात के चलते फसलों को हुए नुकसान पर भी चर्चा होगी।

सरकार के लिए दिक्कतें राज्यसभा में हैं। जेडीयू नेता केसी त्यागी ने साफ कह दिया है कि सरकार को बहुमत का घमंड है, जो राज्य सभा में उसके पास नहीं है। बावजूद इसके सरकार किसी भी बिल पर विपक्ष को भरोसे में लेने को तैयार नहीं है।

किसी भी बिल में बदलाव किया जा रहा है, लेकिन विपक्ष को इसमें भरोसे में नहीं लिया जा रहा है। तो फिर विपक्ष भी सरकार को मुंहतोड़ जवाब देगा। बीमा, कोयला, खान एवं खनन और भूमि अधिग्रहण बिलों को राज्य सभा में पास कराना ही सरकार के लिए असली चुनौती है। इससे निपटने की रणनीति बनाना उसके थिंक टैंक की परीक्षा होगी।
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