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मुस्लिम महिलाओं की राय के बिना तैयार हुई रिपोर्ट पर उठे सवाल

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तीन दफा तलाक बोलकर निकाह तोड़ने की परंपरा पर पाबंदी लगाने की सिफारिश करने वाली पंजाब यूनिवर्सिटी की पूर्व प्रोफेसर पैम राजपूत की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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समिति के सदस्यों के अनुसार समिति ने मुस्लिम महिलाओं के साथ राष्ट्रीय परामर्श किये बगैर उनसे संबंधित सिफारिश रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।

उच्च स्तरीय समिति के दो सदस्यों ने कहा है कि रिपोर्ट तैयार करते समय देश भर की मुस्लिम महिलाओं की दशा के बारे में पूरी जानकारी नहीं ली गई थी।

समिति की सदस्य रजिया पटेल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उनके कई दफा कहने के बावजूद मुस्लिम महिलाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर पर परामर्श नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि इस बारे में टास्क फोर्स गठन में भी दिलचस्पी नहीं दिखाई गई।
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इस रिपोर्ट के आधार राष्ट्रीय नीति बनाने की तैयारी में केंद्र

दूसरी ओर समिति के एक अन्य सदस्य रवि वर्मा ने भी मुस्लिम महिलाओं के देशव्यापी परामर्श नहीं होने की पुष्टि की है। इस बारे में समिति की अध्यक्ष पैम राजपूत का कहना है कि उन्होंने लखनऊ में मुस्लिम महिलाओं से बातचीत की थी।

समिति को उन महिलाओं की स्थिति के बारे में जरूरी जानकारी वहां से मिल गई थी। उन्होंने कहा कि हर मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा करने को अनिवार्य नहीं बनाया गया था।

हालांकि रजिया पटेल का कहना है कि अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग की महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य और शिक्षा पर विस्तार से अध्ययन के लिए देशव्यापी परामर्श जरूरी था।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय नीति बनाने की तैयारी कर रही है। ऑल इंडिया मुस्लिम वुमन की शाइस्ता अंबर ने बताया कि समिति ने कभी भी उनसे मुस्लिम महिलाओं की दशा पर बातचीत नहीं की है।

जबकि वह देश में मुस्लिम महिलाओं स्थिति पर किये जा रहे तमाम अंतरराष्ट्रीय रिसर्च में सहयोग कर रही है। वहीं समिति ने भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन से भी किसी तरह का विचार विमर्श नहीं किया है।
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