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यूपीए सरकार में खुले भारतीय महिला बैंक होंगे बंद

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लोकसभा चुनाव के ठीक पहले आधी आबादी को लुभाने के लिए शुरू हुए भारतीय महिला बैंक को मोदी सरकार ने बंद करना तय कर लिया है।
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एनडीए सरकार का साफ मानना है कि महिला बैंक व्यावहारिकता और कारोबार की कसौटी पर खरा नहीं उतरता दिख रहा है। लिहाजा इसके स्वतंत्र अस्तित्व को कायम रखने का औचित्य नहीं है।

महिला बैंक को बंद करते हुए इसकी मौजूदा शाखाओं का विलय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया या नवगठित मुद्रा बैंक में करने की भी सरकार ने तैयारी कर ली है।

सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय ने महिला बैंक को बंद करने के प्रस्ताव को कैबिनेट में भेजने का मसौदा भी तैयार कर लिया है।

मोदी सरकार का साफ मानना है कि महिला बैंक के गठन के पौने दो साल में उसकी प्रगति असंतोषजनक है। यदि इस बैंक को स्वतंत्र रूप से बनाए रखा गया तो यह करदाताओं की गाढ़ी कमाई के साथ नाइंसाफी होगी।
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एनडीए के मुताबिक राजनीतिक कारणों से तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने इस बैंक की आनन-फानन में नींव रखवा दी। सरकारी खजाने से इस बैंक को 1000 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी दी गई। मगर अपनी 62 शाखाओं के जरिए महिला बैंक कुछ खास नहीं कर पा रहा है।
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सरकार खत्म करेगी इसका स्वतंत्र अस्तित्व

सरकार के इस सूत्र के अनुसार महिला बैंक के अस्तित्व को खत्म करने को आधी आबादी को कमतर आंकने जैसी कोई बात नहीं है। विशुद्ध रूप से अर्थशास्त्र और व्यावहारिकता पर भविष्य में इसके अलाभकारी होने को ध्यान में रखते हुए इसका विलय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में किया जाएगा।

महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण करने के लिहाज से ही फैसला करना था तो यूपीए ने एसबीआई या कुछ अन्य सरकारी बैंक की विशेष महिला शाखाएं खोल दी होती तो ज्यादा बेहतर होता।

एनडीए सरकार का यह भी मानना है कि महिलाओं की काबिलियत साबित करने के लिए नहीं बल्कि यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी को खुश करने के लिए भी महिला बैंक का दांव चला गया।

जबकि दुनिया में इस तरह के बैंक का कोई सफल उदाहरण नहीं रहा है। पाकिस्तान और नाइजीरिया में महिला बैंक का प्रयोग हुआ था मगर वह नाकाम रहा था।
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