फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'पाक दिवस' पर क्यों खामोश है भारत, जानिए असली राज

विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्र की मोदी सरकार ने दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के जमावड़े को तूल न देकर नवाज शरीफ सरकार के साथ बन रहे नए समीकरणों का संकेत दिया है।
विज्ञापन


पिछले साल अगस्त में इसी मोदी सरकार ने दिल्ली में पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित की सिर्फ एक अलगाववादी नेता शब्बीर शाह से मुलाकात पर विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी थी।

करीब चार महीने से चल रही बैक चैनल बातचीत में दोनों पक्ष मौजूदा मौके का फायदा उठाने को राजी हैं। सहमति यह हुई है कि दोनों देशों के सुधर रहे संबंधों को ज्यादा से ज्यादा प्रचारित कर बातचीत के सुगम रास्ते खोले जाएं।
विज्ञापन

भारत-पाक के बीच बन रहे नए समीकरण

पाक सेना, आईएसआई, कट्टरपंथी, आतंकवाद और दोनों देशों के परस्पर विरोधी गुटों की प्रतिक्रिया भांपना भी दोनों सरकारों के अघोषित करार का अहम हिस्सा है।

लगातार चल रही बैक चैनल बातचीत के बीच पिछले महीने की शुरुआत में विदेश सचिव एस जयशंकर की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान संबंधों की नई शुरुआत का खाका तैयार हुआ। उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत पाकिस्तान के मधुर संबंध सिर्फ अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि चीन के लिए भी अहम हैं।

लिहाजा चीन भी पर्दे के पीछे इस दिशा में दोनों देशों की मदद कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस बात पर विस्तार से बहस हुई है कि आतंकवाद से त्रस्त पाकिस्तान की जनता अब भारत की दुश्मनी का ढोल पीटने वाले कट्टरपंथी संगठनों, पाक सेना और आईएसआई को खारिज करने लगी है।

भारत की तरह पाकिस्तान में बड़ी संख्या में मौजूद नौजवान पीढ़ी कश्मीर को दोनों देशों के बीच दुश्मनी का प्रतीक मानने से इनकार कर रही है। यही वजह है कि पाकिस्तान के पिछले दो आम चुनावों में भारत और कश्मीर चुनावी मुद्दा नहीं बना।
विज्ञापन

लगातार आगे बढ़ रहे दोनों देश

सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्ष इस बात के प्रति सतर्क है कि ऐसे नाजुक मौके पर पाक सेना और आईएसआई भारत के साथ दुश्मनी बरकरार रखने के लिए कोई नई चाल नहीं चले। भारतीय पक्ष भी पाक विरोधी गुट पर पैनी नजर रख रहा है।

दोनों पक्षों के लिए राहत की बात यह है कि खुद आतंकी वारदातों से ग्रस्त पाकिस्तानी सेना का पूरा ध्यान अफगानिस्तान सीमा पर है। वह अभी भारत के साथ किसी दुस्साहस की हालत में नहीं।

सूत्रों के मुताबिक बैक चैनल बातचीत में इन छोटी लगने वाली बातों को खास तवज्जो दी गई है। अंदेशा यह है कि नवाज शरीफ की कोशिशों को दरकिनार कर पाक सेना, आईएसआई और आतंकवादी 26/11 जैसी घटना कर देते है तो माहौल बिगड़ते देर नहीं लगेगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें