अगर नेहरू-गांधी परिवार से बने प्रधानमंत्रियों को छोड़ दें तो भारत को मिले ज्यादातर प्रधानमंत्री गरीब और साधारण घर से उठ कर लोकतंत्र के शीर्ष पद पर पहुंचे हैं।
उस दौर के एलीट और उच्च वर्ग से माने जाने वाले देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बाद पीएम पद पर आसीन हुए लाल बहादुर शास्त्री से लेकर नरेंद्र मोदी तक सभी गैर गांधी प्रधानमंत्रियों में से सिर्फ वी पी सिंह राजघराने से ताल्लुक रखते थे।
हालांकि मांडा के राज परिवार के दत्तक पुत्र होने के बावजूद उनकी जिंदगी कई कठिनाईयों से भरी थी।
दिलचस्प पहलू यह है कि देश के विभाजन का दंश झेलने वाले मनमोहन सिंह और आई.के. गुजराल भी प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचे।
12 प्रधानमंत्री साधारण परिवार से
नेहरू की मौत के बाद 1964 से 1966 तक प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री का जन्म बनारस के गरीब किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता स्कूल मास्टर थे और बाद में अंग्रेजों के राजस्व विभाग में साधारण किरानी रहे।
शास्त्री की लिखी जीवनी के मुताबिक पैसे की कमी की वजह से उन्हें रोज पांच मील चलकर स्कूल जाना पड़ता था। शास्त्री के बाद नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी लगातार 11 साल तक पीएम कुर्सी पर काबिज रहीं।
1977 में इमरजेंसी के बाद कांग्रेस के पुराने दिग्गज मोरारजी देसाई करीब दो साल तक प्रधानमंत्री रहे। देसाई भी सौराष्ट्र के वलसाड के साधारण किसान परिवार से थे।
वीपी सिंह राजघराने से
इनके बाद 28 जुलाई, 1979 से 14 जनवरी, 1980 तक पीएम पद पर रहे चौधरी चरण सिंह भी मध्यम वर्गीय किसान परिवार से थे।
उनके पुरखे राजा नाहर सिंह 1957 की लड़ाई में अंग्रेजों के अत्याचार के शिकार बन गए और उन्हें दिल्ली के चांदनी चौक पर फांसी पर लटका दिया गया था। इस घटना से बिखरा परिवार हरियाणा से उत्तर प्रदेश के हापुड़ में आ बसा।
मंडल आंदोलन के महारथी वीपी सिंह 11 महीने के लिए प्रधानमंत्री रहे। वह मांडा रियासत के राजा के दत्तक पुत्र थे। लेकिन बचपन से टीबी रोग से ग्रसित वीपी सिंह कभी खुल कर राज सुख नहीं भोग सके।
वीपी सिंह की लिखी कविताओं में उन्हें जीवन में मिले तिरस्कार की झलक साफ मिलती है। वीपी सिंह के बाद चंद्रशेखर और फिर पीवी नरसिम्हा राव।
गरीबी जिन्हें नहीं रोक सकी
बचपन से फायर ब्रांड रहे चंद्रशेखर बलिया के साधारण किसान परिवार में जन्में थे।
राजीव गांधी की हत्या के बाद पांच साल गठबंधन सरकार चलाने वाले पीवी नरसिम्हा राव भी आंध्र प्रदेश के वारंगल के किसान परिवार के थे। उनका बचपन अभावों से भरा रहा।
इसके बाद बारी थी लोकप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी की। वाजपेयी का परिवार रोजी-रोटी के जुगाड़ में उत्तर प्रदेश से ग्वालियर आ गया था। उनके पिता साधारण स्कूल शिक्षक थे।
इनके बाद पीएम पद पर आए कर्नाटक के एचडी देवगौड़ा किसान परिवार की कमियों और मुश्किलों के बीच बड़े हुए।
मनमोहन-गुजराल ने झेला बंटवारे का दंश
इसके बाद करीब एक साल के लिए पीएम बने आईके गुजराल भी झेलम के मध्यम वर्गीय परिवार में जन्में थे। गुजराल के बाद अटल बिहारी फिर छह साल के लिए पीएम बने।
अटल के बाद दस साल के लिए पीएम बने मनमोहन सिंह अपने बचपन के मुश्किलों की चर्चा खुद कई बार कर चुके हैं।
देश विभाजन का दंश सह चुके मनमोहन ने कमियों के बीच अमृतसर में अपने ननिहाल में रह कर स्ट्रीट लाइट की रोशनी में कई बार पढ़ाई की।
अब देश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे नरेंद्र मोदी का चाय की दुकान से शुरू हुए सफर की चर्चा पूरे देश में हो रही है।