अब भारत के प्रधानमंत्री तीन शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ सीधे हॉटलाइन से जुड़े रहेंगे। प्रधानमंत्री रूस और चीन के राष्ट्राध्यक्षों से पहले से हॉटलाइन से जुड़े हैं। अब बराक ओबामा की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान हुए फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टेबल पर एक और हॉटलाइन फोन लगने वाला है।
इस लाइन के जरिए वह नाभिकीय हमले या किसी गलतफहमी जैसे संवेदनशील हालात में सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत कर सकेंगे। हालांकि नाभिकीय बम से लैंस पड़ोसी देश पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्ष के साथ प्रधानमंत्री के सीधे संवाद का कोई जरिया अब तक नहीं स्थापित हो पाया है।
ओबामा की यात्रा के दौरान दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) का हॉटलाइन से जुड़ना भी सुरक्षा की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। अब भारत और अमेरिका के एनएसए सरकारी प्रोटोकॉल को छोड़ खुफिया संबंधी संवेदनशील जानकारी का सीधा आदान-प्रदान कर सकेंगे।