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दरोगा से ऐसी ठगी, पढ़कर हैरत में पड़ जाएंगे

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फर्जी एएसपी बन कर एक ठग ने सरकारी सीयूजी नंबर पर एक दारोगा को हड़का कर मोबाइल 27 हजार रुपये के मोबाइल रीचार्ज करा लिए।  ठगी का शिकार हो जाने का अहसास होने पर दरोगा के होश उड़ गए। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी एसएसपी को दी।
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पुलिस कर्मी के साथ हुई इस ठगी के बाद एसएसपी के आदेश पर स्वॉट टीम के अलावा लखनऊ की साइबर क्राइम टीम ठग को दबोचने में जुट गई है। बताते हैं कि शनिवार को थाना नवाबाद के प्रभारी इंसपेक्टर रामभजन सिंह के सरकारी मोबाइल नंबर पर प्राइवेट नंबर से फोन आया।

फोन करने वाले ने हनक में स्वयं को एडिशनल एसपी बताया, जिस पर उन्होंने सलाम किया। ठग ने रौब गालिब करते हुए उनसे लोकेशन के बारे में पूछा तो उन्होंने दबिश में जिले से बाहर होने की बात कही। ठग ने इंस्पेक्टर से पूछा कि थाने पर कौन दरोगा है, उससे बात करवाएं।
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खुद को एएसपी बता कर लगाया 27 हजार का चूना

इस पर प्रभारी ने कांफ्रेंसिंग के जरिये इलाइट चौकी इंचार्ज लोकेंद्र त्रिपाठी से बात करवाई। प्रभारी ने चौकी इंचार्ज से कहा कि लाइन पर एएसपी साहब हैं, वह जो भी काम कहें, कर देना। इसके बाद  फोन करने वाले ने थाना प्रभारी को डिस्कनेक्ट कर दिया और चौकी इंचार्ज से हड़काते हुए बात करनी शुरू कर दी।

ठग ने कहा कि वह एक खास मिशन पर लगे हैं, कुछ साथियों के मोबाइल नंबरों का बैलेंस खत्म हो रहा है। वह एयरटेल के रीचार्ज काउंटर पर पहुंचे। इस पर चौकी इंचार्ज एयरटेल के काउंटर पर पहुंचे और उनके द्वारा बताए गए सात नंबरों पर एक- एक हजार रुपये यानी सात हजार रुपये का रीजार्च करवा दिया।

इसके बाद ठग ने एयरटेल की किसी दूसरी दुकान पर पहुंचने को कहा। जब दारोगा दूसरे काउंटर पर पहुंचे तो उनसे दो नंबरों पर10-10 हजार रुपये के रीचार्ज करवाने को कहा गया। जब चौकी इंचार्ज ने रुपये नहीं होने की बात कही, तो ठग ने निलंबित करने की धमकी दी।

डर के मारे दरोगा ने दुकानदार को परिचय देकर उधारी में बताए गए नंबरों को 10-10 हजार रुपये से रीचार्ज करवा दिया। फोन कटने के बाद चौकी इंचार्ज ने थाना प्रभारी को पूरे मामले की जानकारी दी तो उन्होंने उक्त मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, तो स्विच आफ मिला।
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स्वाट टीम व लखनऊ की साइबर क्राइम टीम जुटी जांच में

थाना प्रभारी ने जब चौकी इंचार्ज को मोबाइल नंबर बंद होने की बात बताई तो उन्होंने भी फोन मिलाया, मगर वह नहीं मिला। ठगी का शिकार होने का आभास होने पर चौकी इंचार्ज ने तत्काल एसएसपी को पूरे मामले की जानकारी दी। एसएसपी ने जब उक्त नंबर को सर्विलांस पर लगवाया तो वह बिहार का निकला।

मामले की गंभीरता को देख एसएसपी ने लखनऊ में उच्चाधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी। इस पर स्वॉट टीम के अलावा लखनऊ की साइबर क्राइम सेल को ठग का सुराग लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसएसपी किरन एस. ने बताया कि ठगों का पता लगाने के लिए टीमें जुटीं हुईं हैं।

वारदात ने खड़े किए सवाल

एएसपी के नाम पर दरोगा को चूना लगाने की घटना ने कई सवालों को जन्म दिया है। क्या पहले भी यहां के थानेदार और दरोगा अपने वरीय अधिकारियों के मोबाइल नंबरों पर इस तरह रीचार्ज कराते रहे हैं? या इसी तरह भया दोहन करते रहे हैं।

सामान्य स्थिति में मातहत अधिकारी यह कहते हुए अपना पल्लू झाड़ सकते थे कि रीचार्ज कराने के लिए उनके पास रकम नहीं है। यदि पहली बार उनके साथ ऐसा हो रहा था तब उन्हें कोई संदेह क्यों नहीं हुआ।
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