कहते हैं जाको राखे साईंया मार सके न कोय।
यह कहावत मुंबई के ठाणे में बृहस्पतिवार को ताश के पत्तों की तरह धराशायी हुई इमारत के मलबे से निकाली गई 10 माह की बच्ची पर बिल्कुल सटीक बैठती है।
29 घंटों से राहत और बचाव कार्य में लगे लोगों की खुशी का उस वक्त ठिकाना नहीं रहा जब उन्होंने गुड़िया को मलबे से जीवित बाहर निकाला।
हालांकि इस चमत्कार को देखने के लिए बच्ची के परिवार का कोई सदस्य वहां पर नहीं था।
छत्रपति शिवाजी मेमोरियल अस्पताल के स्टाफ ने बच्ची को गुड़िया नाम दिया है क्योंकि किसी को उसका नाम पता नहीं था। बच्ची का यहीं पर इलाज चल रहा है।
अस्पताल कर्मी एम वाघेला ने बताया कि हम सभी उसे गुड़िया कहकर बुलाते हैं क्योंकि वह गुड़िया (डॉल) की तरह दिखती है। बच्ची को हल्की चोट आई है। वह अब पहले से बेहतर है।
भगवान की कृपा से वह सुरक्षित बच गई और अब हम ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि उसके परिजन आकर उसे ले जाएं।
वाघेला ने कहा कि गुड़िया के एक पड़ोसी ने अस्पताल प्रशासन को बताया है कि उसकी मां और चाची इमारत में रहती थीं लेकिन अब तक कोई भी उस पर हक जताने नहीं आया है।
वहीं दूसरी ओर इमारत के मलबे में करीब 30 घंटे से दबे कुतिबी शेख (65) को भी जीवित निकाला गया है। उन्हें सीएसएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां वे सदमें में हैं लेकिन उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।