मणिपुर में सेना के 18 जवानों की मौत की जिम्मेदारी लेने वाले नेशनल सोसलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (एनएससीएन) के कैपलांग गुट ने केंद्र सरकार के साथ 14 साल से चल रही वार्ता संधि को चीन और पाकिस्तान की शह पर तोड़ दिया था। इतना ही नहीं मणिपुर समेत पूरे पूर्वोत्तर के नागा प्रभाव वाले इलाकों में भारतीय एजेंसियों पर हमला करने के लिए दोनों पड़ोसी देशों की एजेंसियां एनएससीएन (के) सहित अन्य गुटों को भी हथियारों की आपूर्ति कर रही हैं।
बृहस्पतिवार को इस ताजा हमले के बाद गृहमंत्री, रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की आपात बैठक में इन्हीं तथ्यों के आधार पर सेना को इन गुटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए खुली छूट दे दी गई। उधर, पूरे घटना की जांच की जिम्मेदारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को दी गई है। इन भारत विरोधी उग्रवादियों को सबक सिखाने के लिए पड़ोसी देश म्यांमार की भी मदद ली जा रही है। थल सेना प्रमुख दलबीर सिंह पूरे ऑपरेशन की कमान संभालने के लिए खुद मणिपुर में मौजूद हैं।