पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंकियों के स्लीपिंग मॉड्यूल्स खतरे की घंटी बन गए हैं। पुलिस भी मान रही है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों और मुख्य बाजारों में धमाके कर त्योहार बिगाड़ने की साजिश हो सकती है। बिजनौर से भागे सिमी आतंकियों का अभी तक न पकड़ा जाना भी पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना है।
बिजनौर के जाटान मुहल्ले से 12 सितंबर को सिमी के छह आतंकी धमाके के बाद फरार हो गए थे। खुफिया एजेंसियों की पड़ताल में सामने आया था कि इनमें से दो आतंकी मेरठ में पीएल शर्मा रोड से लैपटॉप खरीदकर ले गए थे। खुलासा हुआ था कि मेरठ, गाजियाबाद और दिल्ली में रेकी के दौरान आतंकी एक-एक बैग छोड़ गए थे।
अंदेशा जताया गया कि आतंकियों के मंसूबे दीपावली पर प्रमुख मंदिरों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर एक साथ कई धमाके करने के थे। इस धमाके में बुरी तरह घायल एक आतंकी का भी अभी तक पता नहीं चल सका है।
एक माह से ज्यादा समय बीतने के बाद भी इन आतंकियों की सटीक लोकेशन नहीं मिली है। अफसरों को इसकी चिंता सता रही है। खुफिया सूत्रों के अनुसार आतंकी संगठनों से जुड़े स्लीपिंग मॉड्यूल्स पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हर जिले में हैं। ये आतंकियों को जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराने के साथ उन्हें छिपने में भी मदद करते हैं।
ऐसे मॉड्यूल्स को चिह्नित करना काफी टेढ़ा काम होता है। मेरठ इस लिहाज से भी अतिसंवेदनशील है, क्योंकि सिमी आतंकी यहां कई बार बिजनौर से आकर रेकी कर चुके हैं।
सतर्कता बरतने के निर्देश
आईजी जोन आलोक शर्मा का कहना है कि त्योहार पर खरीददारी करने और दीपावली पर सजावट देखने के लिए मुख्य बाजारों में भीड़ उमड़ती है। जोन के सभी एसएसपी से कहा गया है कि वे पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करा लें। गड़बड़ी के अंदेशे से पहले ही हाई अलर्ट जारी कर दिया है। दीपावली, गोवर्धन और मोहर्रम तक पुलिस को खास सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।