पठानकोट एयरबेस हमले के तार मेरठ से जुड़ने की जानकारी सामने आने और एक आतंकी के हाथ में आने के बावजूद खुफिया तंत्र फेल साबित हो रहा है। इस आतंकी ने अपने शातिर दिमाग से देश की शीर्ष जांच एजेंसी को भी गच्चा दे रखा है।
छह माह तक गार्ड की नौकरी करने और शहर का हर कोना खंगालने वाले इस आतंकी के फैक्ट्री का पता तो क्या रास्ता तक भूलने की बात गले नहीं उतरती।
ऐसे में लोकल इंटेलीजेंस का भी खाली हाथ होना सिस्टम के लापरवाह होने की पुष्टि करता है। आतंकी गतिविधियों का हर बार इनपुट मिलने पर लोकल इंटेलीजेंस से लेकर पुलिस-प्रशासन ने खामोशी की चादर ओढ़ ली है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एसपी के नेतृत्व में दस सदस्यीय टीम सोमवार को शहर में पहुंची थी। टीम के साथ उड़ीसा में एक ट्रेन में आगजनी करने वाला आतंकी भी था।
पुलिस के मुताबिक पठानकोट एयरबेस पर हमला करने वाले आतंकियों से उक्त आतंकी का संपर्क था। ट्रेन में आग लगाने और पठानकोट एयरबेस पर हमला, इन दोनों केसों की जांच एनआईए ही कर रही है।
इस आतंकी ने खुलासा किया था कि उसने मेरठ की एक फैक्ट्री में छह महीने तक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की थी। वह रात में फैक्ट्री में रहता था तो दिन में छावनी समेत शहर के अन्य इलाकों में घूमकर युवकों को अपने साथ जोड़कर आतंकी नेटवर्क मजबूत करता था।
इस आतंकी का पाक जासूस मोहम्मद इजाज से संपर्क में होना भी साबित कर देता है कि पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई देश के सैन्य और सिविल एरिया में कहां तक घुसपैठ कर चुकी है।
आतंकी गतिविधियों का प्लेटफार्म
दरअसल मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश को आतंकी गतिविधियों का प्लेटफार्म माना जाता रहा है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब मेरठ से कोई आईएसआई एजेंट या स्लीपिंग माड्यूल पकड़ा गया हो।
एक दशक से ज्यादा समय से यहां आईएसआई ने अपना नेटवर्क लगातार मजबूत किया है। यहां तक कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, हापुड़ और बिजनौर जिले के आउटर एरिया में कई बार सेटेलाइट फोन के प्रयोग की जानकारी सामने आ चुकी है। मुंबई सीरियल ब्लास्ट का एक आरोपी भी मेरठ में ठहरकर जा चुका था।
कहां गायब हो गई फैक्ट्री
जिस फैक्ट्री में आतंकी ने रात में नौकरी और दिन में सैन्य इलाके की गोपनीय जानकारी जुटायी, उसकी तलाश करने में एनआईए के अलावा लोकल खुफिया विभाग और पुलिस असफल साबित हो रही है।
तमाम प्रयासों के बावजूद भी फैक्ट्री का पता नहीं लगा। पांच घंटे तो खुद एनआईए की टीम ने शहर में कई जगह आतंकी की निशानदेही पर फैक्ट्री तलाशने में मेहनत की, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
कहीं शुगर फैक्ट्री तो नहीं
टीम आतंकी को परतापुर बाईपास स्थित कई फैक्ट्रियों में लेकर पहुंची, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। आतंकी ने बताया कि उस फैक्ट्री का गेट काफी बड़ा था।
फैक्ट्री के बारे में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। डीआईजी रेंज का कहना है कि अंदेशा यह भी है कि यह जिले की कोई शुगर मिल भी हो सकती है। हालांकि इससे ज्यादा अफसर इस मामले में कुछ भी बोलना ठीक नहीं बता रहे हैं।
मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ। लोकल खुफिया विभाग एनआईए की मदद में लगाया गया था। परतापुर, कंकरखेड़ा, दौराला और शहर में कई जगहों पर फैक्ट्री की तलाश की गई, लेकिन कुछ सुराग नहीं लगा है।
- आशुतोष कुमार, डीआईजी रेंज