अलग तेलंगाना राज्य के गठन के प्रस्ताव को हरी झंडी देने के साथ ही कांग्रेस ने चुनावी चादर ओढ़ ली है।
पार्टी ने अब तेलंगाना की सियासत में दबदबा रखने वाले राजनीतिक दल तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) पर खुलेआम डोरे डालने शुरू कर दिए हैं।
टीआरएस प्रमुख चंद्रशेखर राव को पाले में लाने के लिए कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने पार्टी के दरवाजे खोल दिए हैं।
माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही उनसे बात कर टीआरएस का कांग्रेस में विलय करवाने की कोशिश करेगी। राव को राजी करने के लिए उन्हें तेलंगाना के मुख्यमंत्री का पद देने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है।
पढ़ें, बंटेगा आंध्र, बनेगा तेलंगाना, हैदराबाद साझा राजधानी
टीआरएस के कांग्रेस में विलय को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही है। राव कह चुके हैं कि अगर कांग्रेस तेलंगाना राज्य बनाने का रास्ता साफ करती है तो वह अपनी पार्टी के कांग्रेस में विलय के लिए तैयार हैं।
अब कांग्रेस ने चंद्रशेखर को उनकी इस बात की याद दिलाई है। दिग्विजय सिंह ने कहा है कि राव की यह बात उनको अब भी याद है। अब हम टीआरएस की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
पढ़ें, तेलंगाना राज्यः अब तक का सफरनामा
प्रस्तावित तेलंगाना राज्य में 17 लोकसभा सीटें होंगी। ऐसे में केंद्र की सत्ता में काबिज होने के लिए उसे इन सीटों को हासिल करने की सख्त दरकार है। लिहाजा, टीआरएस पर सवार होकर पार्टी अपने सियासी मंसूबे को पाने की पूरी कोशिश करेगी।
तेलंगाना की सियासत ही नहीं, बल्कि केंद्र की सियासत में भी कांग्रेस बाजी मारने की कोशिश की है। तेलंगाना को हरी झंडी देकर पार्टी ने एक तरह से छोटे राज्यों की मांग कर रहे राजनीतिक दलों और लोगों को आशा की एक किरण दिखाई है।
पढ़ें, तेलंगाना राज्य: कैसी होगी गठन की प्रक्रिया?
पार्टी सूत्रों का कहना है कि भले ही कई और छोटे राज्यों के गठन को मंजूरी न दी जाए, लेकिन उनकी उम्मीद जगने से पार्टी को सियासी फायदा जरूर मिल सकता है।
वहीं, पार्टी ने अलग राज्य की मांग को अपनी मंजूरी देकर भाजपा पर भी पलटवार कर दिया है। दिग्विजय सिंह ने कहा है कि एनडीए के शासनकाल में विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने कई बार तेलंगाना बनाने की मांग की थी।
मगर तब के गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने साफ तौर से कहा था कि उनकी सरकार तेलंगाना के गठन के पक्ष में नहीं है।