देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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हालांकि, केंद्र सरकार ने शिक्षक दिवस को गुरु उत्सव के रूप में मनाने का संकेत देकर विवादों को हवा दे दी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उस दिन प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी को 'प्रधान शिक्षक' के रूप में पेश करने की योजना बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी उस दिन दिल्ली में लगभग 1000 छात्र-छात्राओं को संबोधित करेंगे। भाषण का प्रसारण 'एडुसेट' के जरिए देश के 14 लाख स्कूलों में एक साथ किया जाएगा।
भाजपा के सहयोगी दल, विपक्ष की पार्टियां और कई राज्यों की सरकारें केंद्र सरकार के फैसले का विरोध कर रही हैं। शिक्षक और अभिभावक तक केंद्र सरकार के फैसले से खुश नहीं दिख रहे हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'ब्रांड मोदी' के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है। लोकसभा चुनावों में पार्टी 'ब्रांड मोदी' के रूप में मोदी के बहुरूप प्रदर्शित कर चुकी है। और फायदा भी उठा चुकी है।
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बिहार के शिक्षा मंत्री वृषन पटेल ने इसे चाचा नेहरू की तरह चाचा मोदी बनने की आधी-अधूरी कोशिश बताया है।
प्रधान शिक्षक या 'ब्रांड मोदी' का एक और रूप
शिक्षक दिवस के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश भर के छात्र-छात्राओं को संबोधित करेंगे और उनके सवालों का जवाब भी देंगे। राजनीति विश्लेषकों को कहना है कि 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से खुद को देश का प्रधान सेवक बता चुके प्रधानमंत्री अबकी बार 'प्रधान शिक्षक' के रूप में स्थापित होना चाहते हैं।
राजनीतिक मामलों के टिप्पणीकार संदीप रॉय के मुताबिक, प्रधानमंत्री के रूप में मोदी सम्मान के हकदार हैं लेकिन उन्हें शिक्षकों को समर्पित एक दिन को हाईजैक नहीं करना चाहिए।
रॉय का कहना है कि मोदी का भाषण गैरराजनीतिक, तारीफ के काबिल और प्रेरणामय भी हो तो भी उन्हें ये दिन अध्यापकों को ही समर्पित करना चाहिए। शिक्षकों की राय है कि मोदी को उस दिन बच्चों के बजाय शिक्षकों को संबोधित करना चाहिए।
गुरु उत्सव या हिंदी थोपने की एक और साजिश
तमिलनाडु में भाजपा की दो सहयोगी पार्टियां पीएमके और एमडीएमके ने शिक्षक दिवस को गुरु उत्सव के रूप में मनाने का विरोध किया है। डीएमके नेता करूणानिधि भी केंद्र के फैसले के खिलाफ हैं।
पीएमके और एमडीएमके ने केंद्र सरकार के फैसले को संस्कृत थोपने की छद्म प्रयास बताया। करुणानिधि ने टीचर्स डे को नामकरण गुरु उत्सव करने पर कहा कि ये हिंदी थोपने की कोशिश है।
हालांकि भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा का कहना है कि गुरु उत्सव शब्द तमिल में भी 'गुरु उत्सवम्' कहा जाता है। ये आरोप बेबुनियाद है कि केंद्र सरकार छद्म तरीके से ऐसा कर रही है।
जहां संसाधन ही नहीं, वे राज्य कैसे करें इंतजाम
प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से सभी स्कूलों में टीवी, प्रोजेक्टर, एंप्लीफायर और साऊंड सिस्टम का इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन कई राज्यों ने संसाधन का अभाव होने के कारण फैसले का विरोध भी किया है।
उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदश, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल के स्कूलों के सामने कई संसाधनों की चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। पंजाब में गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन ने मंत्रालय के निर्देशों को तुगलकी फरमान बताते हुए कहा कि विभाग ने फंड तक नहीं दिया है ऐसे में यह विशेष व्यवस्था कैसे की जाए।
हिमाचल प्रदेश किन्नौर, चंबा, लाहौल-स्पीति में रेडियो पर प्रधानमंत्री का भाषण सुनाने की व्यवस्था करने निर्देश दिए गए हैं। कश्मीर के दुर्गम इलाकों में इंतजाम करना मुश्किल दिख रहा है। बंगाल की सरकार ने भी संसाधन न होने के कारण हाथ खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मोदी शिक्षक दिवस का इस्तेमाल कर देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू की विरासत के वारिस बनना चाहते हैं। बच्चों से निरंतर संवाद के जवाहर लाल नेहरू बच्चों के बीच लोकप्रिय रहे।
बाद में पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने भी बच्चों से नजदीकी कायम करने की कोशिश की। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी की आगामी कार्यक्रम के बरअक्स वे स्कूलों-कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में खुद गए।
हालांकि भाजपा का कहाना है कि मोदी शिक्षक दिवस पर बच्चों से संवाद कर एक नई परंपरा को जन्म दे रहे हैं।