प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 72825 सहायक अध्यापकों की भर्ती के मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि आवेदकों से पांच सौ रुपये के बजाए पचास रुपये आवेदन शुल्क लिया जाना चाहिए। हालांकि न्यायालय ने इस संबंध में कोई आदेश पारित नहीं किया है।
प्रदेश सरकार से अपेक्षा की है कि आवेदकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के मद्देनजर सरकार को स्वयं इस संबंध में निर्णय लेना चाहिए। टीईटी उत्तीर्ण अखिलेश त्रिपाठी और अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने मामले की सुनवाई सोमवार तक टाल दी है।
इससे पहले याचियों के अधिवक्ताओं ने न्यायालय का ध्यान इस ओर दिलाया कि हर जिले से आवेदन करने के लिए अलग फार्म भरना होगा और प्रत्येक फार्म के साथ पांच सौ रुपये का ड्राफ्ट लगाना होता है। इससे आवेदकों पर बहुत अधिक बोझ पड़ता है।
प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया कि सहायक अध्यापकों की भर्ती को लेकर नियमों में संशोधन किए गए हैं। भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया गया है। इस बार विज्ञापन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा जारी किया गया है। कोर्ट ने जानना चाहा कि जो अभ्यर्थी सिर्फ बीएड की डिग्री रखते हैं उनके संबंध क्या निर्णय लिया गया है।
सरकारी वकील ने अवगत कराया कि ऐसे लोगों के लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक है। इसके बाद इनकी नियुक्ति प्रशिक्षु अध्यापक के पद पर की जाएगी। याचिका पर सुनवाई अब सोमवार को होगी।