टाटा और अनिल अंबानी के रिलायंस एडीएजी जैसे औद्योगिक समूहों को यूपीए सरकार के प्रथम कार्यकाल के दौरान बगैर किसी सिफारिश के ही कोयला खदानें आवंटित की गई थीं। इस आवंटन के दौरान कोयला मंत्रालय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास ही था।
सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को इस पर सवाल किया था कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और ऊर्जा मंत्रालय की ओर से आवंटन की सिफारिश नहीं किए जाने के बावजूद कुछ कंपनियों को कैसे कोयला खदानें आवंटित की गईं?
अदालत के इस सवाल के बाद बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार ने उन 11 कंपनियों की सूची पेश की, जिन्हें ऊर्जा संयंत्रों में उपयोग के लिए खदानों का आवंटन किया गया था।
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इस सूची में टाटा पावर, रिलायंस एनर्जी लिमिटेड, बाल्को एसकेएस इस्पात एंड पावर, प्रकाश इंडस्ट्रीज, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, वीजा पावर, वंदना विद्युत, जीवीके, गगन स्पांज आयरन और लैंको ग्रुप लिमिटेड शामिल हैं।
सर्वोच्च अदालत के समक्ष अटार्नी जनरल गुलाम वाहनवती ने उन आठ कंपनियों की सूची भी पेश की, जिनके नाम की सिफारिश ऊर्जा मंत्रालय ने की थी। लेकिन स्क्रीनिंग कमेटी ने उनका चयन नहीं किया।
इनमें रश्मी सीमेंट, टीआरएन एनर्जी, मैथॉन पावर, महाबीर ग्लोबल कंपनी, रोसा पावर कंपनी, भूषण एनर्जी, लैंको अमरकंटक और वेदांता शामिल हैं। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान खदान आवंटन मामले में स्क्रीनिंग कमेटी के कामकाज पर सवाल उठाए थे। इस समिति की सिफारिश की सूची में शामिल नहीं होने के बावजूद 11 निजी कंपनियों को कोयला खदानें आवंटित की थीं।