बांग्लादेश की विवादित लेखिका तस्लीमा नसरीन भारत में असहिष्णुता नहीं महसूस करती हैं। केरल साहित्य महोत्सव के दौरान उन्होंने कहा कि यहां के अधिकतर लोग एक-दूसरे के विश्वास के प्रति सहिष्णु हैं। भारत का कानून असहिष्णुता का समर्थन नहीं करता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई लोग असहिष्णु हैं।
तस्लीमा ने छद्म धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि झूठी धर्मनिरपेक्षता पर आधारित लोकतंत्र सच्चा नहीं होता है। भारत के धर्मनिरपेक्ष केवल हिंदू रूढ़िवादियों पर ही क्यों अंगुली उठा रहे हैं, जबकि मुस्लिम रूढ़िवादियों को छोड़ दिया गया है।