नई दिल्ली के विज्ञान भवन में चल रही राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की बैठक गुरुवार को तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के तीखे तेवरों की गवाह बनी। अपने भाषण को बीच में ही रोके जाने से नाराज मुख्यमंत्री जयललिता ने एनडीसी की बैठक का बहिष्कार कर दिया। जयललिता ने बोलने के लिए कम वक्त देने का आरोप लगाकर बैठक का बहिष्कार किया।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एनडीसी की बैठक में मुख्यमंत्री जयललिता बोल रहीं थी। उनका भाषण खत्म भी नहीं हुआ था कि तभी भाषण खत्म करने के लिए घंटी बजी और उन्हें बीच में ही रोक दिया गया। जयललिता इस व्यवहार से काफी नाराज हो गई और बैठक छोड़कर बाहर निकल आईं। बाहर आकर उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बोलने का मौका देना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत
इससे पहले प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने देश के विकास में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया। एनडीसी की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर आधी आबादी विकास की प्रक्रिया में भागीदार नहीं होगी तो देश का सार्थक विकास नहीं हो सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना देश विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर ध्यान देने की भी अपील की।
12वीं योजना में औसत विकास दर आठ प्रतिशत
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि योजना आयोग ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में औसत वार्षिक विकास लक्ष्य के अनुमान को 8.2 प्रतिशत से कम कर आठ प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने कहा कि 12वीं योजना में आठ प्रतिशत का महत्वाकांक्षी औसत वार्षिक विकास लक्ष्य रखा गया है। सरकार की प्राथमिकता भारतीय अर्थव्यवस्था से सुस्ती को दूर करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक आर्थिक हालात चिंता का कारण बने हुए हैं। इसके अलावा घरेलू बाधाएं भी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं।