दागी सांसद और विधायक भविष्य में सदन में न तो वोट डाल पाएंगे और न ही भत्ता हासिल कर पाएंगे। नई व्यवस्था लागू करने के लिए कैबिनेट बृहस्पतिवार को जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन पर मुहर लगाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के हिरासत में चुनाव लड़ने पर रोक और दो साल या उससे अधिक की निचली अदालत से सजा मिलने पर अयोग्य घोषित करने संबंधी फैसले के बाद सर्वदलीय बैठक में नई व्यवस्था लागू करने पर सहमति बनी थी।
हालांकि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए बीते सोमवार को पुनर्विचार याचिका दायर कर चुकी है। इस मामले में 4 सितंबर को सुनवाई होनी है।
माना जा रहा है कि सरकार ने सुनवाई के दौरान अपनी ओर से राजनीति में अपराध पर लगाम लगाने की कोशिश करने का तर्क देने के लिए दागी जनप्रतिनिधियों से वोट देने और भत्ता हासिल करने का अधिकार वापस लेने की प्रक्रिया पर मुहर लगाने की तैयारी की है।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की चौतरफा सराहना हुई थी, मगर सभी राजनीतिक दल इस फैसले के खिलाफ एकजुट हो गए थे। इस मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने एक सुर में इस फैसले की आलोचना की थी।
बैठक में फैसले को चुनौती देने पर सहमति बनने के साथ ही दागी सांसदों और विधायकों से वोट और भत्ता का अधिकार वापस लेने पर भी सहमति बनी।
इस आशय का प्रस्ताव सरकार की ओर से रखा गया, जिससे पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान यह तर्क दिया जा सके कि सरकार राजनीति में अपराध को कम करने के लिए अपनी ओर से प्रयास कर रही है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक बृहस्पतिवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक के एजेंडे में जनप्रतिनिधित्व कानून में जरूरी संशोधन के प्रस्ताव को शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि बैठक में जरूरी संशोधन पर मुहर लगा दी जाएगी।
संसद और विधानसभाओं में वर्तमान में 31 फीसदी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें लोकसभा के 162 सांसद शामिल हैं।