विदेश में जमा काले धन को वापस लाने की भारत की कोशिश को करारा झटका लगा है।
काले धन के एक मुख्य पनाहगाह देश माने जाने वाले स्विट्जरलैंड ने स्पष्ट कर दिया है कि कथित खाताधारकों के बारे में अटकलबाजी या अनुमान पर वह विचार नहीं करेगा। भारत को इस मसले पर अंधेरे में तीर चलाने के बजाय ठोस सबूत पेश करने चाहिए।
भारत में स्विट्जरलैंड के राजदूत लाइनस वॉन कैस्टलमर ने पीटीआई से स्पष्ट कहा कि कथित खाताधारकों की चोरी से हासिल सूची पर उनका देश कोई सहयोग नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि भारतीय एजेंसियां या प्रवर्तन निदेशालय इस बारे में सही जांच करें और प्रथम दृष्ट्या कर चोरी का मामला साबित करें, तो स्विस प्रशासन सहयोग करने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि पिछले 50 सालों में क्या हुआ, इस पर बात नहीं की जा सकती। हालांकि उन्होंने वादा किया कि भविष्य में कर चोरी के प्रथम दृष्ट्या सबूत होने पर भी उनका देश भारत का पूरा सहयोग करेगा।
कैस्टलमर ने कहा कि इस मामले में हम भारत की चिंताओं को समझते और उसकी सराहना करते हैं। हमें इस मुद्दे पर स्पष्ट समझ की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का एक हिस्सा भूतकाल से जुड़ा है और स्विट्जरलैंड दशकों से विभिन्न स्रोतों से आने वाले धन का ठिकाना रहा है। हो सकता है वे सारे धन वैध नहीं रहे हों।