स्विस महिला के साथ गत 15 मार्च को हुए गैंगरेप मामले की जांच में पुलिस पहचान परेड जैसी पारंपरिक प्रक्रिया की बजाय वैज्ञानिक सुबूतों को ज्यादा तवज्जो दे रही है।
मध्य प्रदेश के दतिया जिले के इस मामले की सुनवाई शनिवार से स्पेशल एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (एडीजे) जितेंद्र कुमार शर्मा की कोर्ट में शुरू होगी।
चंबल रेंज के डीआईजी डीके आर्य ने कहा, ‘हम इस मामले में दोषियों को पकड़ने के लिए अपनी जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों जैसे डीएनए, उंगलियों के निशान और बालों के सैंपल पर ज्यादा विश्वास कर रहे हैं।’
सूत्रों की मानें तो पुलिस आरोपियों की पहचान परेड नहीं करा पाई है। पीड़ित महिला का कहना है कि आरोपियों की पहचान करना संभव नहीं है, क्योंकि घटना रात के अंधेरे में हुई थी।
हालांकि डीआईजी इससे चिंतित नहीं हैं और उन्होंने कहा कि इससे केस कमजोर नहीं होगा क्योंकि गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों के पास से पीड़ित महिला का लैपटॉप, लैपटॉप-चार्जर, तथा मोबाइल बरामद हुए हैं।
इन सभी चीजों की पहचान महिला के साथी ने कर ली है। उन्होंने कहा कि यह सभी साक्ष्य आरोपियों को अदालत में सजा दिलाने के लिये पर्याप्त हैं।
आरोपियों की पहचान बाबा, भूतहा, रामप्रो, गाजा उर्फ ब्रजेश, विष्णु कांजर तथा नितिन कांजर के रूप में हुई है।
विष्णु और नितिन को छोड़कर सभी के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज किया गया है। इन दोनों पर डकैती और हमला करने का आरोप है।
स्विस महिला अपने पति के साथ साइकिल पर भारत भ्रमण करने निकली थी। वह ओरछा से आगरा जाते समय दतिया के निकट झारिया गांव के पास 15 मार्च की रात शिविर लगाकर रुके थे।
तभी लगभग आधा दर्जन व्यक्तियों ने उनके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस का दावा है कि छह में से चार ने गैंगरेप के आरोप को स्वीकार कर लिया है।