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दिल्ली में फिर लौटा स्वाइन फ्लू, अब तक 3 मरे

Thu, 07 Feb 2013 03:55 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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स्वाइन फ्लू (एच1एन1) ने दिल्ली एनसीआर में एक बार फिर कहर बरपाना शुरू कर दिया है।
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एक निजी समाचार चैनल के अनुसार इससे अब तक कुल मिलाकर 4 लोगों की मौत हो चुकी है। तीन लोगों की मौत राजधानी दिल्ली में हुई है।

जानकारी के अनुसार गुड़गांव में इस वायरस से एक व्यक्ति की मौत हो गई है। स्वाइन फ्लू के 57 मरीजों को दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि स्वाइन फ्लू से बचाव का सबसे बढ़िया उपाय परहेज है । इससे बचाव के लिए सिर्फ दवाओं पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि दवाएं केवल इस पर काबू पाने का एक रास्ता हैं।
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डॉक्टरों का कहना है कि लोगों को कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम जैसी ठंडी चीजों से परहेज रखना चाहिए और ऐसा खाना खाना चाहिए जिससे इंसान की प्रतिरोधक क्षमता बढ़े।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी नई एडवायजरी में आर्युवैदिक और यूनानी तरीकों के इस्तेमाल पर खासा जोर दिया है। मंत्रालय के अनुसार इन तरीकों के इस्तेमाल से प्रतिरोधक क्षमता खासी बढ़ जाती है और एच1एन1 वायरस का खतरा खासा कम हो जाता है।

दिल्ली सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आपात बैठक बुलाई है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ ए के वालिया शुक्रवार शाम सभी सरकारी अस्पतालों के मेडिकल सुप्रिटिंडेंट से मिलेंगे। इसके अलावा डायरेक्टर हेल्थ सेवा को भी बैठक में बुलाया गया है।

क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू एक घातक वायरस है, जो सूअरों से फैला है। सबसे पहले इस बीमारी के लक्षण मैक्सिको के वेराक्रूज इलाके के एक पिग फार्म के आसपास रह रहे लोगों में पाए गए थे। स्वाइन फ्लू दरअसल सुअरों के बुखार को कहते हैं जो कि उनकी सांस से जुड़ी बीमारी है। ये जुकाम से जुड़े एक वायरस से पैदा होती है। ये वायरस मोटे तौर पर चार तरह के होते हैं। एच1एन1, एच1एन2, एच3एन2 इनमें H1N1 सबसे खतरनाक है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण
स्वाइन फ्लू के लक्षण आम मानवीय फ्लू से मिलते जुलते ही हैं। बुखार, सिर दर्द, सुस्ती, भूख न लगना और खांसी। कुछ लोगों को इससे उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं। गंभीर मामलों में इसके चलते शरीर के कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं, जिसके चलते इंसान की मौत भी हो सकती है।
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क्या है इलाज
कुछ हद तक इसका इलाज मुमकिन है। शुरुआती लक्षणों से पता चलता है कि मैक्सिको और अमेरिका के कुछ मरीजों का इलाज टैमीफ्लू और रेलिंजा नामक वायरस मारक दवाओं से सफलतापूर्वक किया गया है। ये दवाएं इस फ़्लू को रोक तो नही सकती पर इसके खतरनाक नतीजों को कम कर जान जरूर बचा सकती हैं। स्वाइन फ्लू से बचने का सबसे अच्छा तरीका साफ सफाई है। छींकते समय हमेशा अपनी नाक और मुंह कपड़े से ढक कर रखें। छींकने के बाद अपने हाथ जरूर धोएं।
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