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दोबारा हो सकता है नित्यानंद का पौरुष परीक्षण

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स्वामी नित्यानंद का पौरुष परीक्षण दोबारा किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रेप के मामले में आरोपी स्वामी नित्यानंद को 8 सितंबर को बंगलौर के एक अस्पताल में पौरुष परीक्षण से गुजरना पड़ा था।
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अस्पताल प्रशासन ने कहा था कि दो दिन बाद मामले की जांच कर रही सीआईडी टीम को जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। हालांकि एक अंग्रेजी अखबार ने दावा किया नित्यानंद का पौरुष परीक्षण हो ही नहीं पाया था।

अखबार ने कहा था कि नित्यानंद को वह विशेष इंजेक्शन दिया ही नहीं जा सका था, जिसके बाद पौरुष परीक्षण किया जाता है।

पूरा नहीं हो पाया था पहला टेस्ट

वहीं, गुरुवार को बंगलौर के विक्टोरिया अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि नित्यानंद का पौरुष परीक्षण पूरा नहीं हो सका था, इसलिए ये परीक्षण दोबारा किया जाएगा।

डॉक्टरों ने बताया कि नित्यानंद टेस्ट के कुछ हिस्सों में शामिल ही नहीं हुए थे, अगर जरूरत पड़ी तो टेस्ट के उन हिस्सों में नित्यानंद को दोबारा शामिल होना होगा।

गौरतलब ‌है विक्टोरिया अस्पताल में ही नित्यानंद का पौरुष परीक्षण किया गया था। पुलिस ने बताया कि नित्यानंद के पौरुष परीक्षण की दोबारा जरूरत पड़ी तो धारा 53 को इस्तेमाल भी किया जा सकता है। मतलब यह कि नित्यानंद ने टेस्ट से मना किया तो बलपूर्वक ये टेस्ट किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया है परीक्षण का आदेश

गौरतलब है कि 2010 में एक रेप कांड में कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा पौरुष परीक्षण कराने का आदेश रोकने के संबंध में दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद नित्यानंद को पौरुष परीक्षण से गुजरना पड़ा था।

ये परीक्षण विक्टोरिया हास्पिटल के नेफ्रो-यूरोलाजी संस्थान में छह डॉक्टरों की एक टीम ने किया था।

सुप्रीम कोर्ट जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई नेतृत्व वाली पीठ ने गत तीन सितंबर को नित्यानंद की याचिका खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा पौरुष टेस्ट कराने के संबंध में दिए गए फैसले को चुनौती दी थी।
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रेप के आरोपी हैं न‌ित्यानंद

2010 में एक एनआरआई महिला ने नित्यानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उसने आरोप लगाया था कि बिदादी आश्रम में उसके पांच वर्ष के प्रवास के दौरान नित्यानंद ने कई बार रेप किया था।

16 जुलाई को हाईकोर्ट ने 2012 में सीजेएम द्वारा सीआईडी जांच की अनुमति देने के फैसले को बरकरार रखा था और नित्यानंद को पौरुष जांच का आदेश दिया था ताकि पता चल सके कि नित्यानंद यौन संबंध बनाने में सक्षम हैं या नहीं।
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