महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भाजपा से तकरार शिवसेना को महंगी पड़ सकती है। खबर है कि यदि शिवसेना नहीं झुकी तो टूट जाएगी।
सूत्रों का दावा है कि शिवसेना के एक दर्जन से अधिक विधायक भाजपा में आने को तैयार बैठे हैं, लेकिन भाजपा के रणनीतिकार जल्दबाजी में कदम उठाकर सरकार के दामन पर दाग नहीं लगाना चाहते। इसलिए पहले एनसीपी के समर्थन से बहुमत साबित करेंगे और फिर शुरू होगा विधायकों के तोड़फोड़ का सिलसिला।
अपने विधायकों को पाला बदलने से रोकने के लिए ही शिवसेना ने भाजपा के प्रति कड़ा रुख अपनाने के बावजूद बातचीत का विकल्प खुला रखा है। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मंगलवार शाम पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई थी।
वैसे तो यह बैठक भाजपा सरकार को समर्थन के मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाई थी, लेकिन इसका मूल मकसद विधायकों को एकजुट रखना था।