भगवदगीता को एक स्वर से राष्ट्रीय ग्रंथ बनाने की मांग शुरू हो गई है।
इस ग्रंथ के 5151वें साल में प्रवेश करने के अवसर पर जीओ गीता द्वारा लालकिला पर आयोजित समारोह में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, विहिप नेता अशोक सिंघल, योगगुरू रामदेव, आयोजक स्वामी ज्ञानानंद ने एक स्वर से गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग की।
विदेश मंत्री ने जहां इसे राष्ट्रीय ग्रंथ बनाने की मांग करते हुए कहा कि वह इसी ग्रंथ की वजह से मंत्री पद की चुनौतियों का सामना कर पा रही हैं। वहीं खट्टर ने कहा कि वह प्रधानमंत्री से मिल कर गीता के 5151वें साल में प्रवेश पर डाक टिकट जारी करने की मांग करेंगे।
खट्टर ने वर्ष 2015 को हरियाणा में गीतावर्ष के रूप में घोषित करने और इस ग्रंथ के 5151 साल पूरे करने पर कुरूक्षेत्र में विराट आयोजन करने की भी घोषणा की। योग गुरू स्वामी रामदेव और विहिप नेता अशोक सिंघल ने गीता को दुनिया का सबसे महान ग्रंथ बताते हुए इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग की।
आयोजन कि अंतिम दिन विदेश मंत्री ने कहा कि वह इस कार्यक्रम में बतौर विदेश मंत्री नहीं बल्कि गीता के अनुसार जीवन जीने वाली साधक के रूप में शामिल हुई हैं। उन्होंने कहा कि वह गीता की वजह से ही मंत्री पद की चुनौतियों का सामना कर पा रही हैं।
कई धार्मिक संगठन हुए एकजुट
सुषमा ने कहा कि गीता की वजह से ही वह बिना किसी परेशानी के विदेश मंत्री की चुनौतियों का सामना कर पा रही हैं। गीता को जीवन की राह बताते हुए उन्होंने दावा किया कि यह ग्रंथ कभी अवसाद नहीं आने देती।
इस दौरान सुषमा ने कहा कि पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को गीता भेंट कर इसे अनौपचारिक रूप से राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा दे दिया है। फिर भी चूंकि इस ग्रंथ में जीवन की तमाम समस्याओं प्रश्नों का उत्तर है, ऐसे में सरकार को इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कर देना चाहिए।
हरियाणा के सीएम ने भी गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग करते हुए अगले साल हरियाणा में गीता वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस ग्रंथ के 5151 साल पूरा होने पर कुरूक्षेत्र जहां भगवान कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया था, वहां भव्य आयोजन करेगी।
गीता उत्सव में बाबा रामदेव, अशोक सिंघल, रमेश भाई ओझा समेत कई दिग्गजों ने शिरकत की और एक सुर से गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग की।
ममता बनर्जी ने जताया एतराज
केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की वकालत किए जाने के कुछ घंटे बाद ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुलकर इसके विरोध में आ गईं। केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर ममता ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि लोकतंत्र में सबसे पवित्र ग्रंथ संविधान होता है।
उन्होंने कहा, ‘हमारा संविधान कहता है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। जहां लोकतंत्र में संविधान ही पवित्र ग्रंथ है। हमें सभी धर्मों के ग्रंथों का समान रूप से सम्मान करना है। कुरान, पुराण, वेद, वेदांत, बाइबिल, त्रिपिटक, जेंदा-अवेस्ता, गुरु ग्रंथ साहिब, गीता हमें सबका सम्मान करना होगा।’
मालूम हो कि नई दिल्ली में गीता प्रेरणा उत्सव में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने के लिए अब बस औपचारिकता ही बची है। इस दौरान विहिप अध्यक्ष अशोक सिंघल ने मांग रखी कि पीएम नरेंद्र मोदी को तत्काल प्रभाव से गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कर देना चाहिए।