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कोली की मां ने किए सनसनीखेज खुलासे

Fri, 12 Sep 2014 09:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ की जेल में मां-बेटे की मुलाकात के बाद जो आरोप सामने आए हैं, वह सनसनीखेज हैं। सुरेंद्र कोली ने अपनी मां को बताया कि उसका पक्ष नहीं सुना गया। खुली अदालत में जब वह बोलेगा तो बड़े-बड़े फंसेंगे। वहीं मां का कहना है, हमारे घर में चाकू तक नहीं है। सीबीआई से कोई तो पूछे कि उसके पास कत्ल के हथियार कहां से आए।
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कोली की मां कुंती देवी का आरोप है कि कोली दिसंबर-2006 में गांव में कालिका मेले में आया था। इस दौरान पंधेर का नौकर और ड्राइवर गांव पहुंचे। कोली से उन्होंने एक रजिस्टर पर साइन कराए थे। कहा था कि उसकी सरकारी नौकरी लगवाने के लिए पंधेर ने तुरंत बुलाया है। उसके बाद लौट आना। लेकिन नोएडा पहुंचते ही पंधेर ने कोली को पुलिस के हवाले कर दिया। कुंती का आरोप है कि पंधेर का सतीश नाम का नौकर भाग चुका था। ऐसा नहीं हो सकता कि सब उसी ने किया हो।

कुंती ने दावा किया, मेरे दो बेटे जेल में कोली से मिलने गए थे। इस दौरान छोटे बेटे को भी फंसाने की साजिश की गई। कोली ने यह कहकर भाई को वापस भेज दिया था कि मैं बहुत दबाव में हूं। तुम दोबारा मत आना। नहीं तो बेवजह फंसोगे। इसके बाद कोई उससे नहीं मिला। अब आठ साल बाद मैं उससे मिली तो उसने बताया कि मुझे ढाई माह रिमांड पर लेकर टॉर्चर किया गया। सवाल किया कि जब मैं रिमांड पर था तो उस दौरान 13 बच्चे गायब हुए, वो तो मैंने नहीं किए।
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कहां तक करते इंतजार:
कुंती के अनुसार कोली जब जेल गया तो सभी यही समझते रहे कि जल्द छूट जाएगा। इसलिए गांव वाले भी खाना दे देते थे। जब बचने की उम्मीद नहीं दिखी तो कोली की पत्नी शांति को उसके मायके वाले दिल्ली ले गए।

'पहले पंधेर को लगे फांसी, फिर मेरे बेटे को मिले सजा'

निठारी कांड में मौत की सजा पा चुके सुरेंद्र कोली उर्फ सदा को उसकी मां कुंती ने निर्दोष बताया है। करीब आठ साल से जेल में बंद कोली से वह बृहस्पतिवार को पहली बार मिलीं। मेरठ जेल में बेटे से मुलाकात के बाद डबडबाई आंखों और रूंधे हुए गले से कुंती ने कहा कि पहले मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी लगनी चाहिए। मेरा बेटा दोषी है तो उसे भी सजा मिले। लेकिन निष्पक्ष जांच के बाद। समय कम है, लेकिन बेटे को बचाने के लिए मैं न्याय की हर चौखट पर जाऊंगी। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दाखिल की जाएगी।

अल्मोड़ा की भिक्यिसैण तहसील के गांव मंगरूखाल निवासी कुंती देवी (82) पत्नी साकरू राम जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत के साथ जेल पहुंचीं। कोली से आधे घंटे की मुलाकात के बाद जेल से बाहर निकलकर कुंती ने कहा, मैंने सदा से पूछा कि क्या उसने ऐसा किया है। वह बोला- मां मैं ईश्वर, घर, मन और आत्मा से कहता हूं कि निर्दोष हूं। पुलिस वालों ने ढाई माह रिमांड पर रखकर मुझ पर दबाव बनाया। मुझसे वह गुनाह जबरन कबूलवाए जो मैंने नहीं किए। मैंने फिर उससे पूछा कि बाबू ऐसा किया हो तो एक बार बता दे। लेकिन बेटे ने रोते हुए मना कर दिया। बकौल सदा, जो कुछ किया, मेरे मालिक पंधेर ने किया। मैं गरीब और लाचार था। इसलिए सारा इल्जाम मुझ पर थोप दिया गया। मैं दबाव में था। मैंने मुख्यमंत्री से लेकर एससी/एसटी आयोग, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजकर न्याय मांगा। लेकिन कुछ नहीं हुआ। जब मुझे फांसी सुनाई गई तो मैं यही सोचकर चुप बैठ गया कि अब कोई चमत्कार ही मुझे बचा सकता है।

कुंती और नारायण रावत ने संयुक्त रूप से कहा कि सुरेंद्र से मिलने के बाद अब हम चुप नहीं बैठेंगे। उसे अभी तक अपना पक्ष तक रखने का मौका नहीं दिया गया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हों या प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या फिर सुप्रीम कोर्ट। हम न्याय की हर चौखट पर जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में हम शुक्रवार को पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे। हम गरीब हैं। लेकिन चंदा करके पैसा जमा करेंगे। हम न्याय चाहते हैं। इसलिए मरते दम तक लड़ेंगे।

...तो नहीं होगी फांसी:
कुंती देवी ने कहा कि चलते समय सुरेंद्र ने मुझसे कहा कि मां यदि तेरे आंसू सत्य होंगे तो मुझे फांसी नहीं होगी। मुझे मेरी मां और ईश्वर पर पूरा भरोसा है।

बेटे से मिलवा दो मां:
सुरेंद्र ने अपनी मां से कहा कि जब मैं जेल गया था तो मेरा छोटा बेटा शांति (पत्नी) के पेट में था। अब तो बड़ा हो गया होगा। मैं उससे मिलना चाहता हूं। कोली ने पत्नी और बेटे से जल्द मिलवाने के लिए कहा। नारायण ने कहा कि शुक्रवार को दिल्ली जाकर शांति का पता लगाया जाएगा।

सवा दो घंटे इंतजार, दो बार चक्कर खाए

कोली की मां कुंती देवी बुधवार शाम पांच बजे कार से जिला पंचायत सदस्य नारायण रावत के साथ गांव से चली थी। करीब 450 किमी का सफर तय करते हुए आधी रात 2:30 बजे मेरठ पहुंची। रात को वह सीएमओ कंपाउंड में नारायण के जानकार के घर रुकी। बृहस्पतिवार सुबह करीब 9:30 बजे कुंती बेटे से मिलने जेल के गेट पर पहुंच गई। मुलाकात के लिए करीब दो घंटे इंतजार करना पड़ा। इस दौरान कुंती दो बार चक्कर खाकर गिरी।

बोली- जब से बेटे को फांसी की बात सुनी, निवाला मुंह नहीं लगाया। सुबह 11 बजे वरिष्ठ जेल अधीक्षक जेल में पहुंचे। लेकिन उस समय बंदियों के पेशी पर जाने के चलते जेल का शेड्यूल व्यस्त रहा। सुबह 11:44 बजे कुंती को जेल के अंदर एंट्री मिली। पहचान के रूप में कुंती ने अपनी वोटर आईडी जमा की। करीब आधा घंटा वह कोली से मिली। मुलाकात कर दोपहर 12:25 बजे कुंती जेल से बाहर निकली। दोपहर 12.56 बजे बजे कुंती और नारायण वहां से चले गए। शाम करीब 4:30 बजे वह मेरठ से अपने गांव के लिए निकल गई।

उधार की चप्पल पहनकर आई:
कुंती गांव की एक महिला से चप्पल भी उधार मांगकर लाई थी। पूछने पर बोली, खाने का तो ठिकाना नहीं बाबू। जिंदगी के आखिरी पड़ाव में मुश्किल से गुजारा हो रहा है। बेटे से मिलना था, इसलिए हाथ फैला लिए। कुंती को जिला पंचायत सदस्य नारायण रावत अपनी कार से मेरठ लेकर आए थे।

खाली हाथ कैसे आती:
पैर भले ही गरीबी के दलदल में धंसे हों। लेकिन मां बेटे से मिलने खाली हाथ नहीं आई। उसके लिए केले और सेब लेकर पहुंची थी। सवा दो घंटे के इंतजार में कुंती ने इन फलों को अपने पास बड़ी हिफाजत से रखा।

पूछ तो लूं, क्या गुनाह किया उसने:
आंसुओं से भरी आंखों में ममता के उमड़ते बादल और चेहरे पर लाचारी के बीच रूंधे हुए गले से मां कहती है कि मेरा बेटा निर्दोष है। उसे फंसाया गया है। मुझसे तो लिपटकर खूब रोया मेरा बेटा। बार-बार बोल रहा था कि मां मैं बेगुनाह हूं। आठ साल बाद मेरठ जेल में सुरेंद्र कोली से मिलने आई कुंती देवी के चेहरे पर बेटे को लेकर असीम चिंता के भाव थे। वह कहती रही- एक बार उससे मिलकर पूछ तो लूं कि क्या गुनाह किया उसने। कानून की नजर में भले ही बेटे पर कितने संगीन आरोप हों और उसे मौत की सजा सुना दी गई हो। लेकिन मैं यही कहती हूं कि उसे उस पंधेर ने फंसाया है। कोली से मुलाकात के बाद जेल से बाहर आकर बोली- मैं बचपन में उसे प्यार से सदा कहती थी। आज मुझे उसका वही रूप दिखा। वह मेरा खून है। उसे में खुद से अलग नहीं कर सकती। उसे बचाने के लिए मैं हर संभव कोशिश करूंगी।
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अब आगे क्या करेंगे कोली के परिजन

सुरेंद्र कोली से मुलाकात के बाद उसकी मां कुंती देवी ने न्याय की लड़ाई का ऐलान किया है। उसने अपने बेटे को फांसी से बचाने के लिए अलग-अलग तरीके से एक ही बात कही, जो यही है कि कोली बेकसूर है। सारा दोष मोनिंदर सिंह पंधेर का है। कुंती की सहायता में आए जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत का कहना है कि वह शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे। पूरी कोशिश रहेगी कि कोली को एक बार उसका पक्ष रखने का मौका दिया जाए। इसके लिए वकील इंदिरा जयसिंह से मिलकर सहायता मांगी जाएगी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत से भी मिला जाएगा।

हमें भरोसा नहीं था:
सुरेंद्र कोली से उसकी मां कुंती को मिलवाने के लिए मुजफ्फरनगर निवासी संजय कश्यप उसके गांव पहुंच गए थे। लेकिन कुंती को गांव के लोगों ने साथ भेजने से इनकार कर दिया था। अब कुंती बिना पूर्व सूचना के मेरठ जेल पहुंच गई। इस बारे में कुंती का कहना है कि एक बार पहले ही मेरे बेटे को पंधेर के आदमी बहकाकर साथ ले गए थे। इससे हम डर रहे थे कि कहीं फिर मुसीबत में न आ जाएं। सच है कि हमें किसी पर भरोसा नहीं रह गया है।

वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसएचएम रिजवी ने कहा कि कुंती देवी ने जेल में बंद बेटे सुरेंद्र कोली से बृहस्पतिवार को आधा घंटा मुलाकात की। देरी का कारण उस समय जेल से पेशी के लिए बंदियों का निकलना रहा। जेल प्रशासन भी चाहता था कि फांसी से पहले एक बार मुलाकात होनी चाहिए। कोली की पत्नी और बच्चे आते हैं, तो उन्हें भी मिलवाया जाएगा।
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