क्या सेना और पुलिस में मुस्लिम जवानों को लंबी दाढ़ी रखने की इजाजत मिलेगी और क्या केंद्र में काबिज मोदी सरकार इसकी अनुमति देगी। करीब सात साल पूर्व सुप्रीम कोर्ट में उठे इस मसले पर अब मोदी सरकार को अपना पक्ष रखना है। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने लंबी दाढ़ी रखने को इस्लाम धर्म का मूल हिस्सा होने पर विचार करने के बदले कानूनी लड़ाई लड़ना बेहतर समझा था।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को इस मसले को लेकर दाखिल याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है। एक मायने में यह मसला एनडीए सरकार पर छोड़ दिया है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब सिखों को लंबे बाल और पगड़ी रखने की इजाजत है तो मुस्लिम जवानों को लंबी दाढ़ी रखने की इजाजत क्यों नहीं दी जानी चाहिए।
लंबी दाढ़ी रखने के कारण वायुसेना से निकाले गए अंसारी आफताब अहमद द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि दाढ़ी रखना धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का हिस्सा है। भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2008 में एयर हेड क्वार्टर पॉलिसी का हवाला देते हुए अहमद को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। वायुसेना का कहना था कि वायुसेना अधिनियम, 1950 की धारा-22 के तहत लंबी दाढ़ी रखने की इजाजत नहीं है।