सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) और सतर्कता आयुक्त (वीसी) की नियुक्ति से पहले उसकी अनुमति अनिवार्य है। साथ ही शीर्ष अदालत ने सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी है।
चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने हालांकि नियुक्ति प्रक्रिया को जारी रखने का निर्देश दिया। अटॉर्नी जनरल मुकुल रहतोगी ने कहा कि वह सीलबंद लिफाफे में नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी देंगे। अदालत एक गैर सरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रही है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार बिना कोई विज्ञापन जारी किए सीवीसी और वीसी की नियुक्त की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। मालूम हो कि पूर्व सीवीसी प्रदीप कुमार का कार्यकाल 28 सितंबर जबकि वीसी जेएम गर्ग का कार्यकाल सात सितंबर को खत्म हो चुका है।
18 सितंबर को पिछली सुनवाई में सीवीसी और वीसी की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव होने पर शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा था कि वर्तमान प्रक्रिया भाई-भतीजावाद और अपनों को बढ़ावा देने वाली है। जिसके बाद अटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया था कि सरकार बिना अदालत को जानकारी दिए सीवीसी और वीसी की नियुक्ति नहीं करेगी।
अदालत ने यह भी कहा था कि केवल नौकरशाहों को ही इन पदों पर क्यों नियुक्त किया जाना चाहिए, आम लोगों को क्यों नहीं।