सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार देर शाम उन 8 लोगों की फांसी पर चार हफ्तों के लिए रोक लगा दी जिनकी दया याचिका राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दी थी।
इन लोगों में सोनिया और उसके पति संजीव, गुरमीत सिंह, प्रवीण कुमार, सुंदर सिंह, जाफर अली, सुरेश और रामजी शामिल हैं।
एनजीओ ने दायर की थी याचिका
इन लोगों की फांसी पर रोक के लिए 'पीपुल्स यूनियन डेमोक्रेटिक राइट्स' नामक एनजीओ ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी।
याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस याचिका पर क्या यह विचार किया गया कि इनके परिजनों की फांसी की सजा के बारे में पूरी जानकारी दी गई है?
'अफजल की फांसी से सबक लें'
बेंच ने कहा कि एक बार फिर से अफगल गुरू मामले की गलती नहीं दोहरायी जानी चाहिए। अफजल गुरू को फांसी पर लटका दिए जाने के बाद उनके परिजनों को सूचना दी गई थी।
सुनवाई के दौरान वकील कॉलिन गोंजाल्वेस ने 18 फरवरी को उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली उस बेंच का उदाहरण दिया जिसने चंदन तस्कर वीरप्पन के 4 सहयोगियों की फांसी पर रोक लगा दी थी।
वीरप्पन के साथियों की फांसी पर रोक का आधार यह था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी की सजा देने के बावजूद दया याचिका कई सालों तक लंबित रखी गई।