चलती बस में युवती से हुई दरिंदगी को लेकर देशभर में हो रहे प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महिलाओं को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने पर केंद्र और राज्य सरकारों से एक महीने के भीतर जवाब तलब किया है। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय ने बलात्कार के सभी मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन संबंधी एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई का निर्णय लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले उपायों पर चार हफ्ते के भीतर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह नोटिस 16 दिसंबर को दिल्ली में 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ गैंगरेप और हत्या के बाद दायर दो याचिकाओं पर जारी किए हैं।
न्यायाधीश पी. सदाशिवम और रंजन गोगोई की बेंच ने वकील मुकुल कुमार की जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर तलब किया है। कुमार ने अपनी याचिका में बलात्कार और यौन उत्पीड़न की जांच के लिए हर शहर और कस्बे में महिला पुलिस थाने स्थापित करने और महिलाओं के खिलाफ हर तरह के भेदभाव समाप्त करने संबंधी संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन को लागू करने का अनुरोध किया है।
इस बीच मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली बेंच बृहस्पतिवार को दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन संबंधी मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगी। याचिका में महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोपों में आरोपित सांसदों और विधायकों के निलंबन की भी मांग की गई है। यह जनहित याचिका पूर्व आईएएस अधिकारी प्रोमिला शंकर ने दायर की है।
प्रोमिला चाहती हैं कि शीर्ष कोर्ट को इस मामले में दखल देना चाहिए क्योंकि देश में हर 40 मिनट पर एक महिला दुष्कर्म की शिकार होती है और इसमें से ज्यादातर मामले दर्ज ही नहीं होते हैं। उन्होंने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि महिला और बच्चों के खिलाफ अपराध और बलात्कार के मामलों की जांच महिला पुलिस अधिकारियों को करनी चाहिए और इन मामलों की सुनवाई महिला जजों को करनी चाहिए।
क्या है याचिका में
जिन सांसदों और विधायकों के खिलाफ महिलाओं से जुड़े अपराध में चार्जशीट दायर हो उन्हें निलंबित करने की मांग की गई है।