सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि गैंगरेप के मामले में किसी लड़की की सहमति संभव नहीं है। इसलिए कोई भी आरोपी गैंगरेप के मामले में लड़की की रजामंदी का दावा कर सजा से बच नहीं सकता।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में लड़की की सहमति वाला पक्ष नहीं हो सकता और यह माना जाएगा कि पीड़िता ने इसके लिए कोई रजामंदी नहीं दी थी।
न्यायमूर्ति बी एस चौहान और एस ए बोबडे की खंडपीठ ने मंगलवार को एक गैंगरेप आरोपी वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने कहा था कि घटना के दौरान लड़की की सहमति थी। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को कायम रखा, जिसमें आरोपियों को 10 साल की सजा दी गई थी।
मामला जून, 1999 में झारखंड का है। जहां दो लड़कों ने एक लड़की को जबरदस्ती एक स्कूल में ले जाकर उससे रेप किया। तभी कुछ और लड़के वहां आ गए और सभी ने लड़की से रेप किया।
कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने इस मामले में तथ्यों पर ठीक से विचार किया। और अदालत ने भारतीय साक्ष्य कानून को ध्यान में रखकर माना कि घटना के वक्त लड़की की सहमति नहीं थी।
कोर्ट ने कहा कि एक समय में कोई भी महिला इतने लोगों को सहमति नहीं दे सकती है, इसलिए यह माना जाएगा कि पीड़िता ने सहमति नहीं दी थी। इसलिए गैंगरेप के मामले में लड़की की सहमति संभव नहीं है।