सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनिसिया) की इजाजत मिलनी चाहिए या नहीं, इसका निर्धारण पीपुल्स कोर्ट (संसद) में होना चाहिए। केंद्र सरकार ने पीठ को बताया कि विधि आयोग की उस रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है जिसमें इच्छामृत्यु को कानूनी बनाने की सिफारिश की गई है। सरकार ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद विधेयक का मसौदा तैयार किया जाएगा।
न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सरकार को अपना प्रयास जारी रखने का आदेश देते हुए सुनवाई 20 जुलाई तक के लिए टाल दिया। वास्तव में सरकार को यह परीक्षण करना है कि क्या लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर चल रहे व्यक्ति या जिसकी बचने की उम्मीद ही न हो तो क्या उसे इच्छामृत्यु की इजाजत दी जा सकती है। सरकार का यह दावा है कि इससे संबंधित विधेयक लंबित है और विधि आयोग ने भी इसका समर्थन किया है।
अदालत एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें लिविंग विल को इजाजत देने की गुहार की गई है। लिविंग विल से आशय वेंटिलेटर पर रखे व्यक्ति या जिसके बचने की उम्मीद न हो, उस व्यक्ति को अपना जीवन खत्म करने की इजाजत मिलनी चाहिए। याचिका में कहा गया है कि जिस व्यक्ति को यह पता हो कि उसकी जान नहीं बच सकती उसे वेंटिलेटर पर रखने की पीड़ा सहने का दबाव क्यों डाला जाना चाहिए।