रेलयात्रियों पर बैक डोर से वित्तीय भार देने के चलते निशाने पर आई मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि समय के साथ-साथ भाड़ों में बढ़ोतरी जरूरी है। हालांकि यह बढ़ोतरी व्यावहारिक होनी चाहिए। न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन और न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह की पीठ ने कहा कि अगर सरकार को ऐसा लगता है कि रेल के भाड़ों में फेरबदल जरूरी है तो वह ऐसा कर सकती है।
लेकिन इस बात का सदैव ध्यान रखा जाना चाहिए कि भाड़े व्यावहारिक हो। अदालत ने कहा है कि सरकार वित्तीय फायदे के लिए ऐसा कर सकती है। घाटे से उबरने के लिए ऐसा किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी रेलवे द्वारा रेलगाड़ी को पार्सल वैन के कुछ हिस्सों को व्यापारी, ठेकेदार आदि को लीज पर देने के सरकार के निर्णय पर दी है।
शीर्ष अदालत कहा कि सरकार मुनाफे के लिए ऐसा कर सकती है। हालांकि इस तरह की लीज देने का निर्णय व्यावहारिक होना चाहिए और समझदारी केसाथ लिया गया निर्णय होना चाहिए जिससे कि अधिक से अधिक मुनाफा संभव हो।