नरेंद्र मोदी सरकार नए साल में किसानों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है। नई फसल बीमा योजना को कैबिनेट की अगली बैठक में मंजूरी मिल सकती है। सूत्र बताते हैं कि नए फसल बीमा योजना को लेकर कृषि मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच फंसा पेंच लगभग सुलझ गया है।
आगामी 6 जनवरी को होने वाली कैबिनेट की बैठक में नई फसल बीमा योजना को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है। बीते 2 दिसंबर की कैबिनेट बैठक में भी फसल बीमा योजना पर चर्चा हुई थी। मगर वित्त मंत्रालय के कुछ आपत्तियों के वजह से योजना को हरी झण्ड़ी नहीं मिल सकी थी।
केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह पहले ही इस बात का एलान कर चुके हैं कि अधिकांश किसानों की ख्ेती को फसल बीमा के दायरे में लाने के लिए वे बीमा प्रिमियम की राशि को बेहद कम रखने के प्रयास में हैं। कृषि मंत्रालय ने दलहन सरीखे फसलों के लिए बीमा प्रिमियम की दर कुल राशि के 2 प्रतिशत रखने की पैरवी की है।
पीएम मोदी से कृषि मंत्री ने की चर्चा
सूत्र बताते हैं कि कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मंगलवार को मुलाकात कर लंबी मंत्रणा की है।
कृषि मंत्रालय किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए बीमा प्रिमियम को बीमा राशि के 2 से 3 प्रतिशत के बीच रखना चाहता है। दलहन पर तो कृषि मंत्रालय प्रिमियम की दर 2 प्रतिशत से ज्यादा मानने को तैयार नहीं है।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले पर चर्चा की है। बताया जा रहा है कि मंगलवार को वित्त मंत्रालय के साथ कृषि मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों की बैठक में अधिकांश मामलों पर गुत्थी सुलझ गई है।
6 जनवरी को मिल सकती है हरी झण्डी
सरकार की तैयारी 6 जनवरी को होने वाली कैबिनेट की बैठक में नई बीमा योजना
को हरी झण्डी देने की है। राधा मोहन सिंह पहले की कह चुके हैं कि मोदी
सरकार किसानों की हितैषी है और नए साल में वह उन्हें तोहफा देगी। वर्तमान
में विभिन्न फसलों पर बीमा के प्रिमियम की दर 3.5 से 8 प्रतिशत तक है।
बीमा
प्रिमियम की दर बेहद महंगी होने की वजह से किसान अपने फसल का बीमा कराने
से बचते हैं। देश के 12 करोड़ किसानों में से महज 2 करोड़ ही अपनी खेत के
फसल का बीमा करवाते हैं।
वहीं वर्तमान नियम के तहत बीमा राशि के निपटारे
में भी ढे़रों खामियां हैं। कहा जा रहा है कि सरकार ने निपटान की समय सीमा
भी कम करने की पहल रखी है।