वालमार्ट लॉबिंग मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस मामले पर जल्द सुनवाई नहीं की जा सकती। चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिस पर सुनवाई के संबंध में प्राथमिकता दी जाए। अदालत इस पर कोई आदेश नहीं जारी करना चाहती, पहले आप इस संबंध में एक आवेदन तैयार करें।
पीठ ने यह टिप्पणी सुनवाई में पेश हुए अधिवक्ता की ओर से जल्द सुनवाई की मांग पर की। अधिवक्ता एमएल शर्मा ने रिटेल सेक्टर में एफडीआई को अनुमति देने के खिलाफ मीडिया रिपोर्ट के आधार पर एक याचिका दायर की है। याचिका में वाशिंगटन की मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जो 2008 से वालमार्ट की ओर से लॉबिंग के लिए किए गए खर्च से जुड़ी है।
अमेरिकी सिनेट के समक्ष पेश की गई लॉबिंग खुलासे की रिपोर्ट के मुताबिक वालमार्ट ने 125 करोड़ रुपये इन गतिविधियों में खर्च किए हैं। इससे भारत के बाजार में प्रवेश और निवेश का मसला भी जुड़ा है।
अधिवक्ता ने कहा कि भारत में लॉबिंग को अनुमति नहीं है, अदालत को इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए और अमेरिकी सिनेट के समक्ष पेश किए गए दस्तावेजों पर गौर करना चाहिए।
सर्वोच्च अदालत पांच नवंबर को यह स्पष्ट कर चुकी है कि रिटेल में एफडीआई के मुद्दे पर वह हस्तक्षेप नहीं करेगी। हालांकि लॉबिंग के मसले पर अदालत ने सुनवाई को 22 जनवरी तक के लिए टाल दिया है।