सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक घटना और आखिरी बार आरोपी को पीड़ित के साथ देखे जाने के वक्त का अंतराल लंबा होने के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया जाना खतरे से खाली नहीं है। इसके साथ शीर्ष अदालत ने जोधपुर हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए हत्या के दोषी को बरी करने का फैसला लिया है।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ ने कहा कि आरोपी और पीड़ित को आखिरी बार देखे जाने में सटीक साक्ष्यों के अभाव और समय अंतराल लंबा हो तो इस नतीजे पर पहुंचना बेहद खतरनाक होगा कि आरोपी ही हत्या के लिए जिम्मेदार है।
पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ही यह व्यवस्था दी गई थी सिर्फ लास्ट सीन थ्योरी केआधार पर आरोपी को दोषी ठहराना न्यायोचित नहीं है। अभियोजन पक्ष की थ्योरी और आखिरी बार आरोपी व मृतक को देखे जाने से पहले और बाद की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही लास्ट सीन थ्योरी को इस्तेमाल करना चाहिए।