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मिल्खा सिंह को अदालत ने दिया जोर का झटका

Tue, 23 Jul 2013 12:15 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह समेत तमाम लोगों की जमीन को अधिग्रहीत करने की चंडीगढ़ प्रशासन की अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रद्द कर दिया। यह जमीन केंद्र शासित प्रदेश में टेक्नोलॉजी पार्क के लिए अधिग्रहीत की जानी थी।
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जस्टिस जीएस सिंघवी व जस्टिस वी. गोपाला गौड़ा की पीठ ने कहा कि प्रशासन की ओर से भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत समुचित प्रक्रिया का अनुसरण नहीं किया गया है।

प्रशासन की ओर से अक्टूबर, 2002 में 71.96 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की गई थी। अधिग्रहण चंडीगढ़ टेक्नोलॉजी पार्क बनाने व अन्य कार्यों के लिए किया जाना था। मिल्खा सिंह व अन्य भू-स्वामियों ने अधिनियम के प्रावधानों का अनुसरण नहीं किए जाने के खिलाफ विस्तृत आपत्तियां दायर की।
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इस मामले में भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने रिपोर्ट के साथ में एक सिफारिश की, जिसमें कहा गया कि वही जमीन अधिग्रहीत की जाएगी जो प्राधिकरण को स्वीकार्य होगी।

सिंह व अन्य भू-स्वामियों ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन हाईकोर्ट ने प्राधिकरण के फैसले को सही मानते हुए उसे जारी रखने का निर्णय दिया। तब मामला सर्वोच्च अदालत पहुंचा।

भू-स्वामियों ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ शीर्षस्थ अदालत में याचिका दायर की और पीठ ने दस्तावेजों पर गौर करने के बाद अधिग्रहण की अधिसूचना को रद्द कर दिया।

पीठ ने कहा कि हम याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता की उस दलील से सहमत हैं जिसमें कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण अधिकारी की रिपोर्ट सही नहीं थी, क्योंकि उसने याचिकाकर्ताओं की ओर से की गई आपत्तियों पर गौर नहीं किया।

पीठ ने कहा कि अधिकारी ने यांत्रिक ढंग से आपत्तियों को अस्वीकार कर दिया और चंडीगढ़ प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने उसकी रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जबकि इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था।
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इसके साथ ही शीर्षस्थ अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया।
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